छत्तीसगढ़

भाजपा सरकार की लापरवाही से पंचायतों का विकास एकदम ठप, DMF की फाइलें महीनों से लंबित — अपनी जायज मांगों को लेकर सरपंचों को जाना पड़ रहा है कलेक्टर के दरवाजे।

आंदोलन और ज्ञापन का लेना पड़ रहा है सहारा।

एमसीबी / मनेन्द्रगढ़ – जिला सरपंच संघ, एमसीबी द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन ने भाजपा सरकार के तथाकथित “सुशासन” की पोल खोल दी है। जिस सरकार ने गांवों के विकास के बड़े-बड़े दावे किए थे, उसी सरकार में आज सरपंचों को अपनी जायज मांगों के लिए आंदोलन और ज्ञापन का सहारा लेना पड़ रहा है।

सबसे गंभीर विषय DMF (जिला खनिज न्यास) की राशि का है। पंचायतों के विकास कार्यों से संबंधित DMF की फाइलों को लंबे समय से लंबित रख दिया गया है और भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण अनेक निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। विकास कार्यों की गति पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है और इसका सीधा नुकसान ग्रामीण जनता को उठाना पड़ रहा है।

इसके अलावा सरपंच संघ ने जिन महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया है, वे भाजपा सरकार की प्रशासनिक विफलता को उजागर करते हैं—

▪️ ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्यों की स्वीकृति समय पर नहीं दी जा रही है, जिससे नए विकास कार्य प्रारंभ ही नहीं हो पा रहे हैं।

▪️ मनरेगा के अंतर्गत सामग्री एवं मजदूरी का भुगतान लंबित है, जिसके कारण मजदूरों और आपूर्तिकर्ताओं को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

▪️ DMF योजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों का भुगतान लंबित है, जिससे पंचायतों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है और विकास कार्य ठप पड़े हैं।

▪️ सरपंचों एवं पंचों का लगभग चार माह का मानदेय लंबित है, जबकि जनप्रतिनिधि लगातार गांवों में जनता की सेवा कर रहे हैं।

▪️ जिले के सभी सरपंचों के साथ कलेक्टर की बैठक कराने की मांग भी की गई है, ताकि पंचायतों की समस्याओं का सामूहिक समाधान निकाला जा सके।

▪️ जनपद स्तर पर मनोनीत सरपंचों की नियुक्ति का विषय भी लंबे समय से लंबित है, जिससे पंचायत व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

भाजपा सरकार को जवाब देना चाहिए कि जब पंचायतें ही आर्थिक संकट से जूझ रही हैं, तब गांवों का विकास कैसे होगा? DMF की फाइलों को आखिर किसके निर्देश पर रोका गया है? पंचायतों का भुगतान कब होगा? मनरेगा मजदूरों और जनप्रतिनिधियों को उनका अधिकार कब मिलेगा?

कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि DMF की लंबित फाइलों का तत्काल निराकरण कर भुगतान जारी किया जाए, मनरेगा और निर्माण कार्यों के सभी लंबित भुगतान शीघ्र किए जाएं, सरपंच-पंचों का मानदेय तत्काल जारी किया जाए तथा पंचायतों के विकास में बाधा बनने वाली प्रशासनिक लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

ब्युरो रिपोर्ट

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