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PMAY-U 2.0 को राजस्थान में डंप करने की तैयारीः नए टेंडर में हाउसिंग एक्सपर्ट के बजाय सामान्य ठेकेदारों को भी बनाया पात्र।

बेहतर मॉनीटरिंग के कारण पिछले एक साल में 2 लाख से भी ज्यादा पात्र परिवारों के बन चुके हैं आवास
 जयपुर / – कमीशनखोरी औऱ चहेती फर्मों को उपकृत करने के लालच में अफसरों ने अब प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-U 2.0) को भी राजस्थान में डंप करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए नए टेंडर इस तरह के प्रावधान किए गए हैं जिससे हाउसिंग फील्ड के एक्सपर्ट के बजाय मैन पावर सप्लाई करने वाली फर्मों और सामान्य ठेकेदारों को भी टेंडर लेने के लिए पात्र बना दिया गया है।
यह स्थिति तो तब है जबकि बेहतर मॉनीटरिंग और समन्वय के कारण राजस्थान में इस योजना में काफी प्रगति हुई थी। पिछले एक साल के दौरान 2 लाख से ज्यादा पात्र परिवारों को अपना आशियाना मिला था। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने खुद विधानसभा में 2 साल बनाम 5 साल विषय पर बोलते हुए इस काम की तारीफ की थी। इसके विपरीत अब हालात ये हैं कि मैन पावर सप्लाई करने वाली फर्में, कंप्यूटर ऑपरेटर, टाउन प्लानिंग, जूनियर असिस्टेंट इंजीनियर जैसे जिनका मात्र 1 लाख रुपए का वर्क ऑर्डर है, उनको भी 25 करोड़ का टेंडर लेने के लिए पात्र कर दिया गया है।
केंद्र सरकार की गाइड लाइन दरकिनारः
हाउसिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक Ministry of Housing and Urban Affairs (MoHUA) द्वारा जारी मॉडल RFP के अनुसार “Similar Project” का स्पष्ट अर्थ है—ऐसा प्रोजेक्ट जिसमें स्थान, कार्यक्षेत्र, अनुबंध की शर्तें और तकनीकी प्रकृति PMAY जैसी हाउसिंग और लाभार्थी आधारित योजना से मेल खाती हो। इस योजना के लिए सामाजिक विकास (Social), वित्त (Finance), IEC, MIS, क्षमता निर्माण (Capacity Building), हाउसिंग विशेषज्ञ तथा डेटा मैनेजमेंट जैसे विशेषज्ञों की जरूरत होती है। लेकिन RUDSICO द्वारा जारी RFP में “Similar Project” की परिभाषा को बदलते हुए PMC, PMISC, DSC, JJM, TSU जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित कार्यों को भी शामिल कर लिया गया है। इससे ऐसी फर्मों को पात्र बनाया जा रहा है जिनका कि हाउसिंग सेक्टर से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसा करना इस योजना के मूल उद्देश्यों के विपरीत है।
पात्रता शर्तों को भी बदल डालाः
एक्सपर्ट्स का कहना है कि टेंडर में अनुभव की अवधि को 7 साल के स्थान पर बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है, ताकि कुछ फर्म विशेष को लाभ पहुंचाया जा सके। जबकि , MoHUA के मॉडल RFP में जहां केवल समान कार्य अनुभव के आधार पर पात्रता तय कर लोएस्ट कॉस्ट (L1) आधारित चयन का प्रावधान है, वहीं इस टेंडर में QCBS प्रणाली लागू करते हुए न्यूनतम 60 अंक अनिवार्य कर दिए गए हैं। सबसे गंभीर बदलाव प्री-बिड मीटिंग में किया गया, जिसमें यह शर्त जोड़ दी गई कि यदि वित्तीय दर समान है, तो अधिक तकनीकी अंक प्राप्त करने वाले को ही टेंडर दिया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव न केवल नियमों के विपरीत है बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
मार्किंग सिस्टम में भी भारी गड़बड़ीः
मार्किंग सिस्टम में भी भारी गड़बड़ी सामने आई है। 5 से कम “समान कार्य” होने पर शून्य अंक देने का प्रावधान किया गया है, जबकि “समान कार्य” की कोई न्यूनतम गुणवत्ता या मूल्य सीमा तय ही नहीं की गई है। इसका परिणाम यह है कि मात्र 1 लाख रुपए के छोटे-छोटे मैनपावर सप्लाई कार्य—जैसे कंप्यूटर ऑपरेटर या जूनियर इंजीनियर उपलब्ध कराना भी “समान कार्य” की श्रेणी में मान लिए गए हैं। इस तरह हाउसिंग सेक्टर की विशेषज्ञता रखने वाली फर्मों को पीछे करके सामान्य मैनपावर सप्लाई करने वाली फर्मों को आगे लाने का रास्ता तैयार किया गया है। इससे राजस्थान में प्रधानमंत्री आवास योजना की सफलता और लागू करने की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
टेंडर को तत्काल रद्द करने की मांगः
हाउसिंग सेक्टर के एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह पूरा टेंडर ढांचा न केवल PMAY के मूल उद्देश्य से भटका हुआ है, बल्कि इसमें पक्षपात, अपारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को सीमित करने के स्पष्ट संकेत मिलते हैं। ऐसे में मांग उठ रही है कि इस टेंडर को तत्काल रद्द कर नई, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाई जाए, ताकि प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य प्रभावित न हो।

ब्युरो रिपोर्ट

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