छत्तीसगढ़

10 हजार की रिश्वत लेते बरमकेला BEO और संकुल समन्वयक रंगे हाथों गिरफ्तार।

सारंगढ़-बिलाईगढ़/बिलासपुर | 17 अप्रैल 2026 भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एसीबी यानि एंटी करप्शन ब्यूरो बिलासपुर ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शिक्षा विभाग में चल रहे रिश्वतखोरी के खेल का पर्दाफाश करते हुए टीम ने बरमकेला खंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र जांगड़े और उनके सहयोगी संकुल समन्वयक संजय चौहान को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

​मामला: इलाज के लिए देरी पड़ी भारी, वेतन रोकने का बनाया दबाव : घटना की जड़ में मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी और पद का दुरुपयोग शामिल है। पूर्व माध्यमिक शाला झीकीपाली के शिक्षक निरंजन बरिहा अपने साथी शिक्षक मुकेश सोना के साथ स्वास्थ्य खराब होने के कारण रायगढ़ मेडिकल कॉलेज इलाज के लिए गए थे। डॉक्टर न मिलने के कारण जब वे वापस स्कूल लौटे, तो उन्हें महज आधे घंटे की देरी हुई।

​इस मामूली देरी को आधार बनाकर बीईओ नरेंद्र जांगड़े ने उनकी गैरहाजिरी दर्ज कर दी और कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। संतोषजनक जवाब देने के बावजूद, बीईओ ने जानबूझकर दोनों शिक्षकों का मार्च माह का वेतन रोक दिया।

 

​वेतन के बदले वसूली: 10,000 की मांग : जब शिक्षक अपना हक मांगने और वेतन जारी करवाने बीईओ कार्यालय पहुंचे, तो नरेंद्र जांगड़े ने वेतन निकालने के एवज में 5,000-5,000 रुपये प्रति शिक्षक यानी कुल 10,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। शिक्षक निरंजन बरिहा ने भ्रष्टाचार के आगे झुकने के बजाय एसीबी बिलासपुर में इसकी शिकायत दर्ज कराई।

​एसीबी का बिछाया जाल और बड़ी कामयाबी : डीएसपी एसीबी बिलासपुर अजितेश सिंह के मार्गदर्शन में शिकायत का सत्यापन किया गया। जांच में सामने आया कि संकुल समन्वयक संजय चौहान भी इस लेनदेन में बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था। योजना के मुताबिक, आज 17 अप्रैल को शिक्षक रिश्वत की राशि लेकर बरमकेला कार्यालय पहुंचे।

​जैसे ही बीईओ जांगड़े ने 10,000 रुपये की राशि लेकर टेबल की दराज में रखी, पहले से तैनात एसीबी की टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद टीम ने तत्काल रिश्वत की रकम बरामद की और बीईओ सहित संकुल समन्वयक को हिरासत में ले लिया।एसीबी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 एवं 12 के तहत मामला दर्ज किया है।

ब्युरो रिपोर्ट

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