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‘पत्नी चाहती थी राहुल गांधी तुड़वाएं अनशन’, सोनम वांगचुक ने बताई अनशन समाप्ति की अंदरूनी कहानी

लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने के पीछे का रोचक अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी राहुल गांधी द्वारा अनशन समाप्त कराने के पक्ष में थीं।

  • सोनम वांगचुक का बड़ा खुलासा: अनशन तोड़ने पर बोले लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता, पत्नी और राहुल गांधी से जुड़ा यह वाकया आया सामने
  • ‘पत्नी चाहती थी राहुल गांधी पिलाएं पानी’… सोनम वांगचुक ने बताया कैसे और क्यों समाप्त हुआ उनका ऐतिहासिक अनशन
  • सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ने की बताई पूरी कहानी, कहा— पत्नी की मंशा थी राहुल गांधी तुड़वाएं भूख हड़ताल

लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा दिए जाने की मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन चला रहे प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने भूख हड़ताल को समाप्त करने के पीछे का एक दिलचस्प अनुभव साझा किया है। दिल्ली के लद्दाख भवन में अपने विरोध प्रदर्शन और अनशन के दौरान के पलों को याद करते हुए वांगचुक ने खुलासा किया कि उनकी पत्नी चाहती थीं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी स्वयं आकर उन्हें पानी पिलाएं और उनका अनशन तुड़वाएं। हालांकि प्रशासनिक बातचीत और स्थानीय मांगों पर गृह मंत्रालय द्वारा ठोस आश्वासन का मार्ग प्रशस्त होने के बाद अनशन को समाप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इस बयान के सामने आने के बाद से लद्दाख आंदोलन और राष्ट्रीय  राजनीति के गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

सोनम वांगचुक के अनुसार, उनके आंदोलन का उद्देश्य किसी एक राजनीतिक दल से जुड़ना नहीं बल्कि लद्दाख के पर्यावरण, संस्कृति और भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करना था। इसलिए जब केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से लद्दाख के प्रतिनिधियों से बातचीत का रास्ता साफ हुआ और प्रतिनिधिमंडलों को औपचारिक वार्ता के लिए समय मिला, तब उन्होंने सामूहिक निर्णय के तहत अनशन समाप्त करने की घोषणा की।

यह पूरा घटनाक्रम लद्दाख से शुरू होकर देश की राजधानी नई दिल्ली तक पहुंचे शांतिपूर्ण सत्याग्रह का हिस्सा है। सोनम वांगचुक और लद्दाख के सैकड़ों नागरिकों ने ‘लेह एपेक्स बॉडी’ और ‘कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ के बैनर तले लद्दाख से दिल्ली तक ‘जलवायु पदयात्रा’ की थी। दिल्ली पहुंचने पर जब उन्हें शुरू में जंतर-मंतर पर अनशन की अनुमति नहीं मिली, तो वे लद्दाख भवन में ही भूख हड़ताल पर बैठ गए थे।

अनशन के कई दिन बीत जाने के बाद वांगचुक का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा था। उस समय राजनीतिक मोर्चे पर भी विभिन्न दलों के नेताओं का समर्थन मिलने लगा था। इसी दौरान उनके परिवार के भीतर इस बात पर चर्चा हुई कि अनशन किसके हाथों तुड़वाया जाए। उनकी पत्नी की इच्छा थी कि चूंकि राहुल गांधी लद्दाख के मुद्दों पर लगातार संसद और मीडिया में आवाज उठाते रहे हैं, इसलिए उन्हें बुलाकर जूस या पानी पिलाने का आग्रह किया जाना चाहिए। हालांकि, आंदोलन की निष्पक्षता बनाए रखने और केंद्र सरकार से चल रही बातचीत के सकारात्मक संकेतों के बीच अनशन को बिना किसी बड़े राजनीतिक दल का सीधा ठप्पा लगाए समाप्त करने का मार्ग चुना गया।

सोनम वांगचुक के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी सरकार या पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि लद्दाख की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेताओं ने भी उनके आंदोलन को समर्थन दिया, जिसके लिए वे आभारी हैं, लेकिन आंदोलन का स्वरूप पूरी तरह से गैर-राजनीतिक और जनहित से जुड़ा रहा है।

दूसरी ओर, कांग्रेस समर्थकों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने हमेशा लद्दाख के युवाओं और पर्यावरण की आवाज को संसद में बुलंद किया है, इसलिए यदि परिवार की ऐसी इच्छा थी तो यह स्वाभाविक था। वहीं, सत्ता पक्ष के समर्थकों का तर्क है कि लद्दाख के मुद्दों का समाधान केंद्र सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच प्रत्यक्ष बातचीत से ही संभव है, जिसे सरकार लगातार आगे बढ़ा रही है।

सोनम वांगचुक के इस खुलासे ने लद्दाख आंदोलन के बहुआयामी स्वरूप को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। इस बयान से यह साफ होता है कि लद्दाख की मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर हर वर्ग और राजनीतिक दल का समर्थन मिल रहा है।

इस घटनाक्रम का असर यह हुआ है कि केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय अब लद्दाख के प्रतिनिधिमंडलों के साथ अधिक गंभीरता से वार्ता की मेज पर बैठे हैं। लेह और कारगिल के नागरिक संगठनों का मनोबल भी इस आंदोलन की सफलता और राष्ट्रीय कवरेज से मजबूत हुआ है, जिससे भविष्य में नीतिगत फैसलों में लद्दाख की स्थानीय जनता की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

अनशन समाप्त होने के बाद अब मुख्य ध्यान गृह मंत्रालय और लद्दाख के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल के बीच होने वाली आगामी उच्चस्तरीय बैठकों पर टिका है। इसमें छठी अनुसूची के प्रावधानों को लागू करने, स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों और भूमि संरक्षण जैसे मुद्दों पर विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाना है।

सोनम वांगचुक और उनके सहयोगी स्पष्ट कर चुके हैं कि अनशन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन जब तक लद्दाख के पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांगें पूरी तरह से लागू नहीं हो जातीं, तब तक उनका जन-जागरूकता अभियान और शांतिपूर्ण प्रयास जारी रहेंगे।

ब्युरो रिपोर्ट

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