धर्म स्वतंत्रता विधेयक के खिलाफ उतरा मसीही समाज, कहा- इसे वापस लिया जाए, जानें क्या है इनकी मांगें
छत्तीसगढ़ में धर्म स्वतंत्रता विधेयक के खिलाफ मसीही समाज के लोग उतर आए हैं। समाज के लोगों की मांग है कि इस विधेयक को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

रायपुर: छत्तीसगढ़ में धर्म स्वतंत्रता विधेयक- 2026 के विरोध में मसीही समाज के लोग उतर आए हैं। संयुक्त मसीही समाज ने इस कानून के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल लोग लोक भवन घेरने के लिए निकले थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। हालांकि इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस के द्वारा लगाए गए बैरिकेड को कूदने की कोशिश कर रहे थे जिस दौरान पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ेगा।
पुलिस के साथ हुई झूमाझटकी
जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की झूमाझटकी भी हुई। हालांकि बाद में स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया। प्रदर्शनकारी विधेयक के खिलाफ नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर पहुंचे थे। यहां से अलग-अलग जिलों के लोग पहुंचे थे और सरकार से इस विधेयक को वापस लेने के लिए लोकभवन के घेराव का फैसला किया।
पुलिस ने इन्हें रोकने के लिए पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे। पुलिस ने धरनास्थल के चारों तरफ बैरिकेडिंग लगाई थी। मसीही समाज का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का यह प्रयास कर रहे थे लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनको रोक दिया। धरनास्थल में मसीही समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
क्या है मसीही समाज की मांग?
- विवादित धर्म विधेयक को तत्काल वापस लिया जाए।
- संविधान के अनुच्छेद 25 का पूर्ण पाल किया जाए।
- धार्मिक स्वतंत्रता में हस्ताक्षेप बंद किया जाए।
- किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव न किया जाए।
- झूठे मामलों और उत्पीड़न पर रोक लगाए जाए।
- मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
- सभी धर्मों को समान सुरक्षा और सम्मान दिया।
कानून में सुधार की मांग
मसीही समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर धर्म स्वतंत्रता विधेयक- 2026 में सुधार नहीं किया गया तो वह विधेयक के खिलाफ कोर्ट में जाएंगे। इसके साथ ही राज्यभर में मशाल रैली और विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगें।
क्या है विधेयक
सरकार ने इस विधेयक को इसी बजट सत्र में पेश किया है जो चर्चा के बाद पारित हो गया है। इस विधेयक में अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने के मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही बिल में कई अन्य प्रावधान किए गए हैं। जिसके बाद मसीही समाज के लोग विरोध में उतर आए हैं।
ब्युरो रिपोर्ट




