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‘RTE कानून लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य नहीं हो’, सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिकाओं पर सुरक्षित रखा फैसला।

राज्य सरकारों ने टीईटी अनिवार्यता का पुरजोर विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की अच्छी शिक्षा पर दिया जोर। पुनर्विचार याचिकाओं पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।

नई दिल्ली। कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता के फैसले का विभिन्न राज्य सरकारों और शिक्षक संघों ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पुरजोर विरोध किया।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, मेघालय सरकार और देश भर के विभिन्न शिक्षक संघों ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध करते हुए कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति आरटीई कानून लागू होने से पहले हुई है उन पर टीईटी की अनिवार्यता का नियम लागू नहीं होना चाहिए। कहा उनकी नियुक्ति भर्ती के समय लागू नियमों के अनुसार हुई थी और अब वे दो दशक से ज्यादा समय से नौकरी कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

हालांकि कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरटीई कानून को बच्चों के लिहाज से देखा जाना चाहिए। बच्चों को अच्छी शिक्षा, योग्य शिक्षक चाहिए अगर शिक्षक योग्य नहीं होंगे तो अच्छी शिक्षा कैसे मिलेगी।

कोर्ट ने ये भी कहा कि नौकरी कर रहे शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए कोर्ट ने दो वर्ष का समय दिया है। कोर्ट ने पुनर्विचार याचिकाओं पर सभी पक्षों की बहस सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

बुधवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने खुली अदालत में पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई की। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु सरकार ने कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति आरटीई कानून लागू होने से पहले हुई है उन पर टीईटी की अनिवार्यता का नियम नहीं लागू होने चाहिए क्योंकि उनकी भर्ती के समय टीईटी नहीं था। उन शिक्षकों की भर्ती उस समय लागू नियम कानूनों के मुताबिक हुई थी।

कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों को स्वयं को अपग्रेड करना चाहिए। तमिलनाडु सरकार ने अपने यहां के आंकड़े बताते हुए कहा कि ज्यादातर शिक्षक टीईटी पास नहीं हैं, अगर कोर्ट का आदेश लागू किया गया तो ज्यादातर शिक्षक बाहर हो जाएंगे।

मेघालय और कुछ अन्य ने कोर्ट से टीईटी करने के लिए दो वर्ष की समय सीमा बढ़ा कर चार वर्ष करने का आग्रह किया। कोर्ट ने मांग पर विचार करने की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता का फैसला दिया था सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर 2025 को शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता का फैसला दिया था। जिसमें कक्षा एक से आठ तक को पढ़ाने वाले सभी शिक्षक जिनकी नौकरी पांच साल से ज्यादा बची है, दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया था।

जिनकी नौकरी पांच साल से कम बची है उन्हें टीईटी से छूट दी थी लेकिन उन्हें भी प्रोन्नति पानी है तो टीईटी जरूरी है। जो शिक्षक दो वर्ष के भीतर टीईटी नहीं कर पाएंगे उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत कर दिया जाएगा।

ब्युरो रिपोर्ट

 

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