छत्तीसगढ़

सुकमा के मोरपल्ली में सात नक्सली स्मारक ध्वस्त, नक्सल प्रतीकों पर फोर्स का प्रहार।

सुकमा के मोरपल्ली गांव में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई हुई है. इस गांव में सात नक्सल स्मारकों को ध्वस्त किया गया है.

सुकमा : दक्षिण बस्तर के संवेदनशील इलाकों में शांति और विकास की बहाली के लिए सुरक्षा बल लगातार सक्रिय हैं. इसी कड़ी में मोरपल्ली गांव में एक विशेष अभियान चलाकर 07 नक्सली स्मारकों को ध्वस्त किया गया. यह कार्रवाई केवल एक भौतिक संरचना को हटाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह उस विचारधारा और भय के प्रतीकों को खत्म करने की दिशा में उठाया गया सशक्त कदम था, जिसने वर्षों तक ग्रामीणों के मन में दहशत का वातावरण बनाए रखा.यह अभियान 74 बटालियन सीआरपीएफ के कमाण्डेंट हिमांशु पाण्डेय एवं 223 बटालियन सीआरपीएफ के कमाण्डेंट नीरज सिंह राठौर के मार्गदर्शन में संचालित किया गया.

जोनापारा और दोरलापारा में कार्रवाई

सुरक्षा बलों ने मोरपल्ली गांव के जोनापारा में 05 और दोरलापारा में 02, कुल 07 नक्सली स्मारकों को ध्वस्त किया. ये स्मारक उन नक्सलियों की स्मृति में बनाए गए थे, जो पूर्व में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे. दोरलापारा में बना एक स्मारक विशेष रूप से तालमेटला में मारे गए नक्सली की याद में बनाया गया था. ग्रामीणों के अनुसार, ये स्मारक अक्सर नक्सली गतिविधियों के प्रतीक के रूप में देखे जाते थे. इनके आसपास बैठकों और प्रचार-प्रसार की गतिविधियां भी संचालित होती थीं. ऐसे में इन प्रतीकों का अस्तित्व क्षेत्र में भय और वैचारिक प्रभाव को बनाए रखने का माध्यम बन चुका था.

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मोरपल्ली में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

संयुक्त टीम की सशक्त मौजूदगी

अभियान का नेतृत्व दयावीर सिंह, सहायक कमाण्डेंट (E/223) एवं सुमन सोरभ, सहायक कमाण्डेंट (C/74) ने किया. उनके नेतृत्व में दोनों बटालियनों के जवानों ने समन्वित ढंग से क्षेत्र में प्रवेश किया. पुलिस थाना चिंतलनार के थाना प्रभारी विमल बट्टी के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस बल भी अभियान में शामिल रहा. वहीं E/223 बटा के अधीनस्थ अधिकारियों और जवानों ने भी पूरी मुस्तैदी दिखाई. थाना चिंतलनार के मुख्य आरक्षक धर्मेन्द्र राव, नीरज पाण्डेय सहित थाना स्टाफ की सहभागिता ने इस अभियान को और सुदृढ़ बनाया

प्रतीकों का अंत, विश्वास की शुरुआत

सुरक्षा बलों ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए उनकी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी. इसका उद्देश्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि विकास के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना है. मोरपल्ली में 07 नक्सली स्मारकों को गिराना इस लंबी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.
स्मारकों को हटाने की यह कार्रवाई केवल ढांचागत परिवर्तन नहीं है. यह उस मानसिकता को समाप्त करने की दिशा में एक प्रयास है, जो लंबे समय से ग्रामीणों को मुख्यधारा से दूर रखे हुए थी.

नक्सली स्मारक बनते थे ग्रामीणों के लिए मुसीबत

दक्षिण बस्तर के गांवों में नक्सलवाद का प्रभाव वर्षों तक गहराई से महसूस किया गया. जंगलों के बीच बसे छोटे-छोटे गांवों में अक्सर ऐसे स्मारक ग्रामीणों के लिए दुविधा का कारण बनते थे. अब जब सुरक्षा बल लगातार क्षेत्र में कैंप स्थापित कर रहे हैं, सड़क निर्माण, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा है, तो ऐसे प्रतीकों का हटना एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है.

         ब्युरो रिपोर्ट

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