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बिना कोचिंग, पहले प्रयास में हिमाचल की ”नंदिनी” ने रचा इतिहास: UPSC परीक्षा में किया।

हिमांचल की बेटी ने रचा इतिहास पहले प्रयास में बिना कोचिंग UPSC परीक्षा में किया पास।

हरोली (ऊना): कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य पर अर्जुन जैसी एकाग्रता हो, तो बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान के भी पहाड़ जीता जा सकता है। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की बेटी नंदिनी ठाकुर ने इसी बात को सच कर दिखाया है। यूपीएससी (UPSC) की संयुक्त भू-वैज्ञानिक परीक्षा में देश भर में पहला स्थान हासिल कर नंदिनी ने न केवल अपने गांव पंजावर का मान बढ़ाया, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक नई मिसाल पेश की है।

तपस्या जैसी मेहनत: 15 घंटे पढ़ाई और खेल से नाता

नंदिनी की यह सफलता किसी चमत्कार का परिणाम नहीं, बल्कि उनकी कड़ी तपस्या है। दिल्ली विश्वविद्यालय से फिजिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली नंदिनी ने खुद को घर की चारदीवारी में सीमित कर लिया था।

रोजाना 14 से 15 घंटे तक किताबों के साथ वक्त बिताना। मानसिक ताजगी के लिए खेलकूद की गतिविधियों को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। उन्होंने किसी भी बाहरी कोचिंग का सहारा नहीं लिया और अपने पहले ही प्रयास में शीर्ष रैंक हासिल की।

साधारण परिवार, असाधारण सपने

नंदिनी की जड़ें मिट्टी से जुड़ी हैं। उनके पिता संजय ठाकुर पेशे से किसान हैं और माता राजरानी एक कुशल गृहिणी हैं। एक कृषक परिवार से निकलकर देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में टॉप करना उनकी असाधारण प्रतिभा को दर्शाता है। परिवार में उनके भाई आदित्य ठाकुर भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं।

शिक्षा का सफर: गांव से देश की राजधानी तक

नंदिनी की कामयाबी का आधार उनके गृह क्षेत्र में ही रखा गया था। नंदिनी ने स्कूली शिक्षा के बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। दिल्ली विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान (Physics) में विशेषज्ञता हासिल की।

बधाइयों का सैलाब

नंदिनी की इस ऐतिहासिक जीत पर हिमाचल के उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने उन्हें और उनके परिवार को शुभकामनाएं दी हैं। इसके अलावा, स्थानीय पंचायत प्रधान नीलम मनकोटिया और एचआरटीसी के निदेशक रणजीत सिंह मनकोटिया सहित पूरे क्षेत्र ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए इसे नारी शक्ति की जीत करार दिया है।

“नंदिनी ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बस लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम डगमगाने नहीं चाहिए।”

ब्युरो रिपोर्ट

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