ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते और आहट के तहत लगातार कारवाही जारी रखते हुए रेलवे पुलिस ने ट्रेनों में ‘कैद’ बचपन को दिला रहे आजादी! RPF ने ऑपरेशन ‘नन्हे फरिश्ते’ के तहत 2026 और ‘आहट’ के तहत 54 बच्चों को बचाया।

नई दिल्लीः 20 मार्च को बिहार के मुजफ्फरपुर से साबरमती जनसाधारण ट्रेन लखनऊ स्टेशन पर पहुंची। RPF के जवानों ने ट्रेन की जांच शुरू की। चेकिंग के दौरान करीब 10 मिनट ही बीते थे तभी कुछ RPF के जवानों ने ऊपर की बर्थ पर सो रहे दो बच्चों को देखा। उनकी उम्र करीब 13 और 14 साल की थी। बच्चों को उन्होंने जगाया तो वह डर गए। जवानों ने उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि उन्हें पता नहीं कि वह कहां जा रहे हैं।
जांच आगे बढ़ी तो तीन और बच्चे ऐसे पाए गए, जिन्हें गुजरात ले जाया जा रहा था। अधिकारियों को मानव तस्करी की भनक लगी तो पूरे डिब्बे में छानबीन तेज की, जिसके बाद RPF ने बच्चों को गुजरात ले जाने वाले सरगने को पकड़ा तो इसकी पोल खुल गई। इसके बाद RPF ने आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज कराई। इस ऑपरेशन में आरपीएफ इंस्पेक्टर चंदना सिन्हा, एएसआई एसएन राय, शिव कुमार यादव, हेड कांस्टेबल जावेद कॉन्स्टेबल रीना सिंह, सविता, पूनम शामिल रहीं।
वाराणसी से सामने आया था मामला
ऐसा ही एक और मामला 11 नवंबर 2025 को वाराणसी में सामने आया था जहां 9 साल की बच्ची से लेकर 15 साल तक के करीब 28 बच्चों को गुजरात ले जाया जा रहा था। RPF के जवानों को सूचना मिली, जिसके बाद एक टीम मुगल सराय के पास ओखा एक्सप्रेस ट्रेन में जांच की। इसमें अधिकारियों ने देखा कि एक 9 साल की बच्ची ऊपर की बर्थ पर सो रही थी, जिसके साथ उसका एक भाई भी था, जिसकी उम्र करीब 10 साल रही होगी। कड़ी मशक्कत के बाद अधिकारियों ने मानव तस्कर को पकड़ा।
दरअसल, नॉदर्न रेलवे की ओर से बीते एक साल में ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत 2026 और ऑपरेशन आहट के तहत 54 बच्चों को तस्करों से मुक्त कराया गया है। दिल्ली मंडल के सीनियर डीएससी आशुतोष पांडेय ने बताया कि शनिवार को आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर एक संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान 12 बच्चों (4 लड़के और लड़कियों) को रेस्क्यू कर लिया गया है।
लखनऊ डिविजन में तस्करी के सबसे ज्यादा मामले
बीते एक साल में करीब 50 बच्चों को मानव तस्कर के शिकंजे से मुक्त कराया गया है। इनमें 15 साल से कम उम्र आयु के बच्चे पाए गए। उनके परिवार को चद पैसों की लालच देकर उनके मासूमों को प्रताड़ना की भठ्ठी में झोंक रहे। सबसे ज्यादा मानव तस्करी के मामले लखनऊ डिविजन में ही पकड़े गए है।
लखनऊ मंडल के सीनियर डीएससी देवांश शुक्ला ने बताया कि मानव तस्करों के खिलाफ शिकंजा कसने के लिए कई टीमें लगी हुई है, जो बिहार या फिर बंगाल से आने वाली ट्रेनों में जांच करती है। जांच में सीसीटीवी से लेकर आधुनिक तकनीक की मदद से तस्करों के मंसूबों को तोड़ रहे है।
ब्युरो रिपोर्ट




