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शिवराज चौहान को पर्यवेक्षक बनाए जाने के बाद अटकलों का बाजार गर्म, क्या सच में बीजेपी के सीएम और पर्यवेक्षक के चयन में है कोई संबंध?

दिल्ली / – केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा ने बिहार विधायक दल की बैठक के लिए पर्यवेक्षक बनाया है। बिहार में बीजेपी के विधायक दल का नया नेता शिवराज सिंह चौहान की देखरेख में ही चुना जाएगा। इस बीच सोशल मीडिया पर अटकलों का बाजार भी गर्म हो गया है। पिछले कुछ सालों में बीजेपी को लेकर सोशल मीडिया पर एक मिथक बना है कि जिस वर्ग के पर्यवेक्षक को बीजेपी नियुक्त करती है, सीएम उस वर्ग का नहीं चुना जाता है। लोग राजस्थान का उदाहरण दे रहे हैं, जहां पर वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री पद की प्रमुख दावेदार मानी जा रहीं थीं लेकिन तत्कालीन पर्यवेक्षक राजनाथ सिंह ने भजनलाल शर्मा का नाम विधायकों के सामने रखा।

जनसत्ता ने इन दावों की पड़ताल करने के लिए पांच राज्यों के चुने गए सीएम का विश्लेषण किया।

1- वसुंधरा राजे और राजनाथ सिंह

हम राजस्थान से ही शुरुआत करते हैं। 2023 में राजस्थान में जब बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला तब मीडिया में ख़बरें चलने लगीं कि वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री पद की प्रबल दावेदार हैं। वह तीन बार सीएम रह चुकी थीं। बीजेपी ने राजनाथ सिंह को पर्यवेक्षक बनाया था। जब विधायक दल की बैठक हुई और राजनाथ सिंह ने वसुंधरा राजे को भावी सीएम के नाम की पर्ची दी तो वह चौक गई थीं। वसुंधरा का प्रतिक्रिया का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

सीएम की नियुक्ति के बाद लोग कहने लगे कि बीजेपी को वसुंधरा राजे को हटाना था इसलिए पर्यवेक्षक के रूप में राजनाथ सिंह को भेजा गया। दोनों नेता सामान्य वर्ग से आते हैं। वसुंधरा का जन्म राजपूत परिवार में हुआ था और उनकी शादी धौलपुर के जाट राजघराने में हुई। राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने वाले भजनलाल शर्मा भी सामान्य वर्ग से हैं। यानी राजस्थान में जिस वर्ग के प्रबल दावेदार का पत्ता कटा और जिस वर्ग के पर्यवेक्षक थे उसी वर्ग से मुख्यमंत्री चुना गया।

2- वेंकैया नायडू और योगी आदित्यनाथ

अब हम उत्तर प्रदेश 2017 विधानसभा चुनाव के नतीजे को लेते हैं। 2017 के चुनाव में जब बीजेपी को प्रचंड जीत मिली, उसके बाद सीएम चुनने की बारी आई, तब बीजेपी ने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री रहे वेंकैया नायडू को पर्यवेक्षक बनाकर उत्तर प्रदेश भेजा था। उन्होंने सामान्य वर्ग से आने वाले योगी आदित्यनाथ को सीएम के तौर पर चुना था। वेंकैया नायडू खुद भी आंध्र प्रदेश के ब्राह्मण परिवार से आते हैं। ऐसे में यूपी में भी सामान्य वर्ग से आने वाले पर्यवेक्षक ने सामान्य वर्ग के नेता को ही सीएम के तौर पर चुना।

3- अर्जुन मुंडा और विष्णु देव साय

2023 में ही छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला था। तीन बार के मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह सीएम पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे हालांकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को चुना गया। विष्णु देव अनुसूचित जनजाति से आते हैं। इस राज्य में विधायक दल की बैठक कराने के लिए अर्जुन मुंडा को पर्यवेक्षक बीजेपी ने बनाया था। अर्जुन मुंडा भी अनुसूचित जनजाति से ही आते हैं। यहां भी जिस वर्ग से पर्यवेक्षक थे, इस वर्ग का सीएम चुना गया।

4- निर्मला सीतारमण और फड़नवीस

अब बात करते हैं महाराष्ट्र की, जहां पर 2024 के आखिर में बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने प्रचंड जीत दर्ज की थी। जब बीजेपी के विधायक दल की बैठक की बारी आई तब पार्टी हाई कमान ने केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा। निर्मला सीतारमण सामान्य वर्ग से आती हैं। उन्होंने विधायकों से सलाह लेने के बाद पूर्व सीएम देवेंद्र फड़नवीस का नाम आगे बढ़ाया। देवेंद्र फड़नवीस भी सामान्य वर्ग से आते हैं। ऐसे में यहां पर भी पर्यवेक्षक का जो वर्ग था, उसी वर्ग का मुख्यमंत्री चुना गया।

मनोहर लाल खट्टर और मोहन यादव

2023 में ही जब बीजेपी को मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री चुनना था, तब विधायक दल की बैठक लिए के लिए हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भेजा गया था। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में लड़ा गया था और वह इस पद के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। मनोहर लाल खट्टर पंजाबी खत्री समुदाय से आते हैं जो सामान्य वर्ग की जाति है। यहां पर मनोहर लाल खट्टर ने विधायक दल की बैठक में मोहन यादव का नाम मंच से पुकारा। मोहन यादव ओबीसी समुदाय से आते हैं जबकि शिवराज सिंह चौहान भी इसी वर्ग से आते हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश में सामान्य वर्ग के पर्यवेक्षक ने विधायकों से सलाह लेने के बाद ओबीसी वर्ग के मुख्यमंत्री को चुना।

ब्युरो रिपोर्ट

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