वेदांता पावर प्लांट में बायलर ब्लास्ट: 20 श्रमिकों की मौत, निदेशक अनिल अग्रवाल सहित अन्य पर FIR दर्ज।
प्रमुख आरोपी: निदेशक अनिल अग्रवाल, प्रबंधक देवेंद्र पटेल एवं अन्य।

सक्ती / – जिले के डभरा थाना अंतर्गत ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार (14 अप्रैल) को हुए भीषण बायलर विस्फोट ने पूरे प्रदेश को दहला दिया है। इस हृदयविदारक घटना में अब तक 20 श्रमिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 15 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के निर्देश पर वेदांता कंपनी के निदेशक अनिल अग्रवाल, प्रबंधक देवेंद्र पटेल और अन्य अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है।*
खौफनाक मंजर: दबाव नहीं झेल पाया बायलर*
घटना 14 अप्रैल की दोपहर 02:33 बजे की है। बायलर नंबर-01 में अचानक हुए जोरदार धमाके से पूरा प्लांट थर्रा उठा। शुरुआती जांच और FSL सक्ती की रिपोर्ट के अनुसार, बायलर फर्नेस के भीतर ईंधन (Fuel) का अत्यधिक संचय हो गया था। इससे उत्पन्न भीषण दबाव के कारण बायलर का निचला पाइप अपनी जगह से उखड़ गया और गर्म गैस व मलबे की चपेट में आने से वहां काम कर रहे श्रमिक बुरी तरह झुलस गए।

लापरवाही ने ली जान: मानकों को ताक पर रखा*
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि वेदांता और एन.जी.एस.एल. (NGSL) ने सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की। उपकरणों के रखरखाव में बरती गई कोताही और संचालन में की गई उपेक्षा के कारण ही यह ‘मानव निर्मित आपदा’ घटित हुई। तकनीकी रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यदि समय रहते दबाव पर नियंत्रण पाया जाता, तो 20 मासूमों की जान नहीं जाती।
*कानूनी शिकंजा: स्पेशल टीम करेगी जांच*
पुलिस ने थाना डभरा में अपराध क्रमांक 119/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है।
![]()

प्रमुख आरोपी: निदेशक अनिल अग्रवाल, प्रबंधक देवेंद्र पटेल एवं अन्य।
*जांच दल:* एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने एएसपी पंकज पटेल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की है, जिसमें एसडीओपी सुमित गुप्ता, फोरेंसिक एक्सपर्ट सृष्टि सिंह और थाना प्रभारी राजेश पटेल शामिल हैं।
*अस्पतालों में जिंदगी की जंग*
हादसे में घायल 15 श्रमिकों का इलाज रायगढ़ के मेडिकल कॉलेज, अपेक्स और मेट्रो अस्पताल में चल रहा है। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है, लेकिन आक्रोशित श्रमिक संगठनों ने इसे ‘दुर्घटना’ नहीं बल्कि ‘हत्या’ करार देते हुए कड़ी सजा की मांग की है।
दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सुरक्षा मानकों में लापरवाही के स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं, जिसके आधार पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”*
प्रफुल्ल ठाकुर, पुलिस अधीक्षक, सक्ती
ब्युरो रिपोर्ट




