छत्तीसगढ़

15 हिरणों की मौत के बाद वन विभाग में फेरबदल, दो IFS अफसरों का तबादला ।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित संजय पार्क (वन वाटिका) में 15 हिरणों की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के सामने आने के बाद वन विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए न केवल जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा फेरबदल किया गया है। जारी आदेश के अनुसार, आईएफएस अधिकारी प्रभाकर खलखो (2014 बैच), जो अब तक सरगुजा में प्रभारी वन संरक्षक (कार्य योजना मंडल) के पद पर पदस्थ थे, उन्हें कोरिया जिले में वन उप संरक्षक (प्रादेशिक) के पद पर स्थानांतरित किया गया है।

वहीं, आईएफएस चन्द्रशेखर शंकर सिंह परदेशी (2020 बैच), जो कोरिया में वन उप संरक्षक (प्रादेशिक) के रूप में कार्यरत थे, उन्हें सरगुजा में प्रभारी वन संरक्षक (कार्य योजना मंडल) के पद पर पदस्थ किया गया है। दरअसल, यह पूरा मामला 21 मार्च को सामने आया, जब सरगुजा वनमंडल के संजय वन वाटिका में 4 से 5 आवारा कुत्ते बाड़े में घुस गए और हिरणों पर हमला कर दिया। इस हमले में 15 हिरणों की मौत हो गई। घटना के बाद वाटिका प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगे कि उन्होंने मामले को दबाने की कोशिश की। बताया गया कि मृत हिरणों में से 14 के शवों को जंगल के पीछे ले जाकर चुपचाप जला दिया गया, ताकि घटना उजागर न हो सके। हालांकि, बाद में मामले की जानकारी सामने आने पर स्थिति स्पष्ट हुई और विभाग में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही डीएफओ अभिषेक जोगावत मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया।

बाड़े में एक हिरण का शव मिला, जबकि पीछे जंगल में जलाए गए अवशेषों के सबूत भी सामने आए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीओ के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई थी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुख्य वन संरक्षक, सरगुजा वनवृत्त दिलराज प्रभाकर ने सख्त रुख अपनाते हुए वन वाटिका के प्रभारी सहित तीन सहायकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबित अधिकारियों का मुख्यालय सरगुजा वनमंडल, अंबिकापुर निर्धारित किया गया है। वन विभाग की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि सरकार और प्रशासन इस मामले को लेकर गंभीर हैं और जिम्मेदारों को बख्शने के मूड में नहीं हैं। हिरणों की मौत और शवों को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से यह घटना बेहद चिंताजनक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती, तो इस तरह की घटना टाली जा सकती थी। फिलहाल, जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है। यह मामला वन विभाग के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्कता बरती जाएगी।

ब्युरो रिपोर्ट

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