छत्तीसगढ़
धोवाताल बना मॉडल गांव, पलायन रुका गांव में ही मिल रहा रोजगार गौठान से चमकी किस्मत धोवाताल की 60 महिलाओं ने रची आत्मनिर्भरता की मिसाल रुका पलायन, गांव में ही रोजगार बदली पूरी तस्वीर।

एमसीबी/10 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र का छोटा सा गांव धोवाताल आज आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास की मिसाल बनकर उभर रहा है। जहां कई जगह गौठान योजनाएं निष्क्रिय पड़ी हैं, वहीं इस गांव की 60 महिलाओं ने गौठान को किराए पर लेकर उसे आजीविका के मजबूत केंद्र में बदल दिया है। करीब 150 घरों और 510 की आबादी वाले इस गांव में महिलाओं ने स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक क्रांति की शुरुआत की है। इनकी मेहनत से न केवल परिवारों की आय बढ़ी है, बल्कि गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

5 समूह, एक लक्ष्यकृआत्मनिर्भर गांव
बजरंगबली समूह (बकरी पालन) – अध्यक्ष सूरजवती के नेतृत्व में फूलमती, मानमती, सोनमती, सुभद्रा, गुड़िया, कमलिया, पुष्पलता, सुमित्रा सहित सदस्य बकरी पालन कर रही हैं।
सिद्धबाबा समूह (मुर्गी पालन) – अध्यक्ष कृष्णकुमारी के साथ आभा, उर्मिला, केवली, प्रेमिया, कुन बाई, गुलबिया एवं सोनकुवर मुर्गी पालन से जुड़ी हुई हैं।
महिला सशक्तिकरण समूह (किराना दुकान) – अध्यक्ष इन्द्र कुंवर के नेतृत्व में फूलमतिया, संतोषी, धरम कुमारी, राजकुमारी, रूकमनी, मान कुंवर एवं सेती बाई किराना दुकान का संचालन कर रही हैं।
सीता महिला समूह (बहुआयामी आजीविका) – अध्यक्ष दुरपतिया के साथ रूनिया, बसंती, लीलावती, कुशमिला, सूरजवती, चंदा एवं बिलासो बाई सुअर पालन के साथ बटेर और मछली पालन का कार्य कर रही हैं।
दुर्गा महिला समूह (किराना व मनिहारी दुकान) – अध्यक्ष गीता के नेतृत्व में मानमती, कुसुम कली, रामकली, मंगलिया, सुमन, शांति, रूपा एवं चम्पाकली दुकान संचालन में जुटी हैं।

सहायता को बनाया निवेश, खड़ा किया व्यवसाय
महिलाओं को क्लस्टर स्तर से मिली 60-60 हजार रुपये की सहायता को खर्च करने के बजाय उन्होंने इसे निवेश में बदल दिया। आज उनके उत्पाद बहरासी और चुटकी जैसे हाट-बाजारों के साथ-साथ मध्यप्रदेश तक पहुंच रहे हैं।
रुका पलायन, गांव में ही रोजगार
इस पहल का सबसे बड़ा असर पलायन रुकने के रूप में सामने आया है। जो युवा पहले रायपुर, गुजरात और मेरठ जैसे शहरों की ओर जाते थे, अब उन्हें गांव में ही रोजगार मिल रहा है।
NRLM से मिली दिशा, बढ़ा आत्मविश्वास
समूह अध्यक्ष फूलमती सिंह के अनुसार, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से मिली प्रेरणा और सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया। आज वे पशुपालन और दुकान संचालन के माध्यम से लगातार आय अर्जित कर रही हैं। समूह सदस्य मानमती का कहना है कि बकरी पालन अब उनकी आय का मजबूत स्रोत बन चुका है।

गांव के युवाओं को भी मिला सहारा
गांव के युवा प्यारेलाल, उस्मान चेरवा और रामकुमार का कहना है कि अब उन्हें रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। गांव में ही काम मिलने से आय के साथ संतुष्टि भी मिल रही है।

अधिकारियों ने सराहा मॉडल
ग्राम सरपंच गोकुल प्रसाद परस्ते के अनुसार, गौठान में संचालित गतिविधियों से गांव में आर्थिक समृद्धि आई है और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है। जनपद भरतपुर के एडीईओ ऋषि कुमार ने बताया कि विकासखंड में हजारों समूह सक्रिय हैं, लेकिन धोवताल का मॉडल विशेष रूप से प्रेरणादायक है।
एक मिसाल, जो सिखाती है
धोवाताल की यह कहानी बताती है कि सही दिशा, सामूहिक प्रयास और संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसी भी गांव की तस्वीर बदली जा सकती है।
ब्युरो रिपोर्ट




