राजनांदगांव में पुलिस की सतर्कता से 8 वर्षीय दिव्यांग बालक 2 घंटे में मां से मिला ।

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में बसंतपुर थाना पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक 8 वर्षीय दिव्यांग बालक महज 2 घंटे के भीतर अपनी मां से मिल गया। पुलिस की इस संवेदनशील पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की है और परिजनों ने भी आभार व्यक्त किया है। जानकारी के अनुसार, जबलपुर (बेलखेड़ा) की मूल निवासी और वर्तमान में डोंगरगढ़ के लावणी भाटा में रह रही उषा साहू अपने 8 वर्षीय दिव्यांग पुत्र कृष्णा साहू के साथ राजनांदगांव जिला कार्यालय आई थीं। वह अपने बेटे का आधार कार्ड सुधारने के काम से आई थीं। काम पूरा न होने के बाद वह बच्चे की जिद के कारण उसे रानी सागर चौपाटी लेकर पहुंचीं, जहां उन्होंने उसे झूला झुलाया।
बताया गया कि कड़ी धूप से बचने के लिए मां एक छांव वाली जगह पर बैठ गईं, जबकि बच्चा झूला झूलते-झूलते पैदल ही भीड़ की ओर निकल गया। दिव्यांग होने के कारण बालक कृष्णा न तो अपना नाम बता पा रहा था और न ही पता, जिससे वह शहर में भटक गया और मां से अलग हो गया। इसी दौरान बसंतपुर थाना पुलिस गश्त पर थी। पुलिस टीम की नजर अकेले और परेशान हालत में घूम रहे बच्चे पर पड़ी। थाना प्रभारी ऐमन साहू ने तुरंत बच्चे को सुरक्षित थाने लाने के निर्देश दिए। पुलिस ने बच्चे से पूछताछ करने की कोशिश की, लेकिन वह अपने घर या परिजनों की जानकारी देने में असमर्थ था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत सक्रियता दिखाई। बच्चे की फोटो खींचकर उसे स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुपों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया। पुलिस के इस त्वरित प्रयास का असर यह हुआ कि सूचना तेजी से फैली और कुछ ही समय में बच्चे के परिजनों तक जानकारी पहुंच गई। इसी बीच परेशान मां उषा साहू अपने बेटे की तलाश करते हुए बसंतपुर थाना पहुंचीं। जैसे ही बच्चा थाने में अपनी मां से मिला, उसने तुरंत उन्हें पहचान लिया और उनके पास दौड़कर पहुंच गया। इस भावुक क्षण को देखकर थाना परिसर में मौजूद लोग भी भावुक हो गए। पुलिस ने आवश्यक पहचान और औपचारिकताओं के बाद बच्चे को उसकी मां के सुपुर्द कर दिया।
यह पूरी प्रक्रिया लगभग 2 घंटे के भीतर पूरी कर ली गई, जो पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और संवेदनशीलता को दर्शाता है। परिजनों ने बसंतपुर थाना पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय पर पुलिस सक्रिय नहीं होती तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली की प्रशंसा की और इसे एक सराहनीय उदाहरण बताया। थाना प्रभारी ऐमन साहू ने बताया कि गश्त के दौरान ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाती है ताकि किसी भी बच्चे को कोई नुकसान न पहुंचे। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिकता है और इस मामले में टीम ने समन्वय के साथ तेजी से काम किया। यह घटना न केवल पुलिस की तत्परता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि तकनीक और सोशल मीडिया का सही उपयोग किस तरह से किसी परिवार को फिर से जोड़ सकता है। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की इस पहल को सकारात्मक और प्रेरणादायक बताया है।
ब्युरो रिपोर्ट




