अनूपपुर में ‘खाकी और खादी’ का रहस्यमयी गठजोड़: सुलगते सवाल ?
दोहरे हत्याकांड और संदिग्ध मौत से पूरे इलाके में सनसनी

पं अजय मिश्र की खास रिपोर्ट
म.प्र ./ बिजुरी – मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के बिजुरी में राजनीति और प्रशासनिक रसूख का एक खौफनाक और शर्मनाक गठजोड़ देखने को मिल रहा है। यहाँ एक मासूम नाबालिग बेटी की अस्मत लूटकर उसकी नृशंस हत्या कर दी जाती है और फिर इस जघन्य कांड के एकमात्र चश्मदीद गवाह को भी हमेशा के लिए खामोश कर दिया जाता है। इस पूरे खूनी खेल के बीच जब जनता खादी और खाकी को बंद कमरों में गुप्त गुफ्तगू करते देखती है, तो व्यवस्था की संवेदनहीनता पर तीखे सवाल उठने लाजिमी हैं। सत्ता की हनक और बंद कमरों की यह ‘रहस्यमयी डीलिंग’ साफ गवाही दे रही है कि आम जनता की जिंदगी इन रसूखदारों की सियासत के आगे महज एक मोहरा बनकर रह गई है।
.दोहरे हत्याकांड और संदिग्ध मौत से पूरे इलाके में सनसनी
बिजुरी में हुए इस नाबालिग के नृशंस हत्याकांड और उसके बाद एकमात्र चश्मदीद गवाह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इस मामले ने अब एक बेहद गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। जनमानस में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आख़िर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कौन सी ऐसी रसूखदार ताकतें काम कर रही हैं, जिन्हें बचाने के लिए सत्ताधारी दल और प्रशासन एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। घटना के बाद से ही बिजुरी और आसपास का जनसमुदाय खौफ और गुस्से के साए में जीने को मजबूर है।
दिखावे का ज्ञापन और बंद कमरे की गोपनीय बैठक
इस पूरे मामले में भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष हीरा सिंह श्याम के नेतृत्व में मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री और पुलिस अधीक्षक के नाम एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपा गया है। इस ज्ञापन में ऊपरी तौर पर तो पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं और बिजुरी थाना प्रभारी (टीआई) विकास सिंह को निलंबित करने की मांग की गई है। लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। रविवार की दोपहर अचानक भाजपा के तीन पूर्व जिला अध्यक्षों—ब्रजेश गौतम, आधाराम वैश्य और अनिल कुमार गुप्ता का पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचना और बंद कमरे में लंबी गोपनीय बैठक करना कई गंभीर और तीखे सवालों को जन्म देता है।
क्या अपराधियों को ‘अभयदान’ देने की रची जा रही है स्क्रिप्ट?
इस बंद कमरे की मुलाकात ने समूचे जिले की राजनीतिक हवा को संदेहास्पद बना दिया है। जब पार्टी सार्वजनिक रूप से पुलिस पर ‘लीपापोती’ का आरोप लगा रही है, तो फिर आख़िर ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि भाजपा के तीन-तीन पूर्व कद्दावर जिला अध्यक्षों को बंद कमरे में पुलिस कप्तान के साथ गुप्त गुफ्तगू करनी पड़ी? यह रहस्यमयी जुगलबंदी साफ तौर पर इस बात की ओर इशारा करती है कि कहीं न कहीं एक जघन्य मामले को मोड़ने या फिर इसमें शामिल किसी बड़े और रसूखदार चेहरे को ‘अभयदान’ देने की स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है। जनता अब खुले तौर पर पूछ रही है कि यह मुलाकात इंसाफ के लिए थी या अपराधियों को बचाने की ढाल बनने के लिए?
चश्मदीद गवाह की मौत ने खोली पुलिस सुरक्षा के दावों की पोल
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 20 मई 2026 की रात को हुई, जब बिजुरी निवासी नाबालिग को गंभीर रूप से घायल अवस्था में शासकीय चिकित्सालय बिजुरी लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों और स्थानीय समुदाय का स्पष्ट आरोप है कि यह सामूहिक बलात्कार और सुनियोजित हत्या का मामला है, जैसा कि भाजपा ने अपने ज्ञापन में भी कहा है। इस भयावह कांड का एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी चश्मदीद साक्षी अमन यादव था, जो अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचा सकता था। लेकिन अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि 23 मई 2026 को अमन यादव की लाश बौरीडांड रेलवे स्टेशन के नजदीक संदिग्ध अवस्था में बरामद हुई, जिसने पुलिस के दावों की पोल खोलकर रख दी।
एमएलसी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘लीपापोती’ की आशंका
स्थानीय जनसमुदाय और मीडिया में इस बात की पुरजोर आशंका जताई जा रही है कि अमन यादव की भी सोची-समझी रणनीति के तहत हत्या की गई है ताकि मुख्य आरोपियों को बचाया जा सके। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस थाना बिजुरी का जो वक्तव्य सामने आया है और एमएलसी व पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो अस्पष्टता रखी गई है, वह पुलिस प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। भाजपा के अपने ज्ञापन में भी यह दर्ज है कि पुलिस द्वारा इस योजनाबद्ध सामूहिक बलात्कार और दोहरे हत्याकांड के प्रकरण को ‘लीपापोती’ कर एक सामान्य घटना में परिवर्तित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।
गृह जिले की घटना पर राज्य मंत्री की रहस्यमयी चुप्पी
इस पूरे संवेदनशील और रूह कंपा देने वाले मामले में सबसे निराशाजनक पहलू प्रदेश के माननीय राज्य मंत्री की भूमिका को लेकर है, क्योंकि अनूपपुर जिला स्वयं उनका गृह जिला है। अपने ही गृह क्षेत्र में एक नाबालिग बेटी की अस्मत लूट ली जाती है, उसकी नृशंस हत्या कर दी जाती है, और न्याय की गुहार लगाने वाले एकमात्र गवाह को भी रास्ते से हटा दिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद मंत्री महोदय की गहरी चुप्पी हैरान करने वाली है। इस उदासीनता ने क्षेत्र के आदिवासियों, पिछड़ों और आम नागरिकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सत्ता की हनक के आगे मासूमों की चीखें बेअसर हो चुकी हैं? जब पूर्व विधायक ने परिजनों से मिलकर सांत्वना दी, तब कहीं जाकर मंत्री जी ने परिजनों के घर दस्तक दी।
मंत्री विरोधी खेमे की सक्रियता और टीआई पर टिकी नजरें
एक तरफ जहां पूरा जिला इस अमानवीय घटना से उद्वेलित है, वहीं दूसरी तरफ मंत्री विरोधी खेमा लगातार पुलिस अधीक्षक की शरण में जाकर न्याय की गुहार लगा रहा है। इस समय पूरी सियासत और जांच की सुई बिजुरी टीआई विकास सिंह पर आकर टिक गई है और वे राजनीति के केंद्र बिंदु (मछली की आंख) बने हुए हैं। मंत्री विरोधी खेमा लगातार थाना प्रभारी को हटाने और निलंबित करने की मांग पर अड़ा हुआ है। अब सवाल यह उठता है कि क्या टीआई को हटाना ही इस पूरे मामले का एकमात्र विकल्प है या फिर यह असली गुनाहगारों से ध्यान भटकाने की कोई प्रशासनिक ढाल है?
आक्रोश शांत करने का ढोंग या आंतरिक राजनीतिक लड़ाई?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा द्वारा दिया गया यह ज्ञापन महज जनता के तीव्र आक्रोश को शांत करने और खुद को इस पाप से अलग दिखाने का एक सुनियोजित ढोंग है। एक तरफ जनता को दिखाने के लिए तीखे शब्दों में पुलिस की लानत-मलानत की जा रही है और मंत्री विरोधी खेमे द्वारा थाना प्रभारी को निलंबित करने की मांग की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ बंद कमरों में बैठकर उसी पुलिस के साथ समझौते और सेटिंग का दौर चल रहा है। यह दोमुंहा रवैया सत्ताधारी दल के भीतर की अंदरूनी खींचतान और प्रशासनिक कमजोरी को पूरी तरह से बेनकाब करता है।
गठित हुई एस आई टी
शहडोल जोन की पुलिस महानिरीक्षक (IG) एन. चैत्रा (भा.पु.से.) द्वारा अनूपपुर जिले के बिजुरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक गंभीर मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष अन्वेषण टीम का गठन किया गया है। यह मामला ऊर्जा नगर बिजुरी में रहने वाले 17 वर्षीय नाबालिग मृतक अमन यादव (पिता सुनील यादव, मूल निवासी बिहार) की मृत्यु से जुड़ा हुआ है। घटनाक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय द्वारा अपराध क्रमांक 188/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं में दर्ज इस प्रकरण की गहन विवेचना और न्यायालय में अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत करने हेतु यह विशेष आदेश जारी किया गया है।
इस नवगठित विशेष अन्वेषण टीम का पर्यवेक्षण शहडोल जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीवान को सौंपा गया है, जो समय-समय पर मामले की वर्तमान स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत कराएंगे। टीम के सक्रिय सदस्यों में कोतमा थाना प्रभारी निरीक्षक रत्नाम्बर शुक्ला, भालूमाड़ा थाना प्रभारी निरीक्षक उमेश उपाध्याय और कोतवाली अनूपपुर की उप निरीक्षक सरिता लकड़ा को शामिल किया गया है। आदेश के अनुसार, यह टीम तत्काल प्रभाव से मामले की विवेचना में जुट गई है और आवश्यकता पड़ने पर जांच को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त विवेचकों की मांग भी कर सकेगी।




