राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शनों में ‘सरप्राइज एलिमेंट’ एक नई राजनीतिक रणनीति को दर्शाता है: कांग्रेस नेता

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने शनिवार को कहा कि राहुल गांधी के हालिया विरोध प्रदर्शनों में चौंकाने वाला तत्व विपक्ष के नेता की राजनीतिक रणनीति में बदलाव को दर्शाता है और भविष्य में भी इसके जारी रहने की संभावना है.
ऐसे दो मामले हैं जब केंद्र सरकार को अचानक हुई घटनाओं का पता नहीं चला- पहला, 21 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के गेट पर राहुल की अगुवाई में अचानक हुआ विरोध प्रदर्शन और दूसरा, 21 अगस्त को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में विपक्ष के नेता (LoP) का अचानक पहुंचना.
ये दोनों घटनाएं उन छात्रों को न्याय दिलाने से जुड़ी हैं जो पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था और अलग-अलग परीक्षाओं के आयोजन में हुई गड़बड़ियों के लिए सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं. 21 जुलाई की घटना उस शाम हुई जब सरकार ने नीट पेपर लीक और 20 जुलाई को विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस की बर्बरता के मुद्दे पर बहस करने से इनकार कर दिया था. 20 जुलाई को ही संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ था.
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक 21 जुलाई के विरोध प्रदर्शन में ‘सरप्राइज एलिमेंट’ (अचानक कुछ करने का तत्व) को आखिरी समय तक बनाए रखा गया था. कांग्रेस सांसदों को पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर इकट्ठा होने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्हें इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है.

विपक्ष के नेता (LoP) अपनी बात पर अड़े रहे और बाद में पुलिस ने उन्हें जबरन वहां से हटाया और अन्य सांसदों के साथ हिरासत में ले लिया. विपक्ष के नेता के दबाव के कारण सरकार को, जो पहले अनिच्छुक थी, नीट मुद्दे पर बहस के लिए सहमत होना पड़ा.
‘देखिए, हमारे नेता का जो असर देखने को मिल रहा है, उसके पीछे दो पहलू हैं – उनका व्यक्तित्व और उनका काम करने का तरीका. राहुल गांधी ही एकमात्र ऐसे नेता हैं जो सरकार का डटकर सामना कर रहे हैं क्योंकि वे एक प्रतिबद्धता और विचारधारा से प्रेरित हैं. उनकी आंतरिक शक्ति उन्हें ऐसा करने में सक्षम बनाती है.
इसके अलावा उन्हें नेहरू-गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत भी मिली है. इसी वजह से वे लोगों के लिए लड़ने वाले एक निस्वार्थ नेता बने हैं. यह सब उनकी राजनीति में साफ झलकता है, जिसमें ‘सरप्राइज एलिमेंट’ ने एक अहम भूमिका निभाई है,’ प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने में शामिल रहे कांग्रेस के राज्यसभा सांसद क्रिस्टोफर तिलक ने ईटीवी भारत को बताया.

जब राहुल ने लोचव के मामले में एफआईआर दर्ज होने तक वहां से हटने से इनकार कर दिया, तो सलमान खुर्शीद, अधीर रंजन चौधरी, कुमारी शैलजा, जयराम रमेश और पवन खेड़ा जैसे वरिष्ठ नेता विपक्ष के नेता (LoP) का समर्थन करने के लिए कुछ घंटों बाद वहां पहुंचे. लगभग आठ घंटे के विरोध-प्रदर्शन के बाद, जिससे दिल्ली पुलिस को नियंत्रित करने वाले गृह मंत्रालय के लिए काफ़ी नकारात्मक प्रचार हुआ, तब जाकर उच्च अधिकारियों से इसकी मंज़ूरी मिली.
अचानक लिए गए फ़ैसले से ज़्यादा, मैं यह कहना चाहूंगा कि इन दो विरोध-प्रदर्शनों ने विपक्ष के नेता (LoP) की राजनीति का एक नया अंदाज दिखाया है. वह सभी को अपने अधिकारों के लिए लड़ने का संदेश दे रहे हैं. हमारे नेता यह संदेश भी दे रहे हैं कि वह आम लोगों के लिए न केवल संसद के अंदर, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर सड़कों पर भी लड़ने के लिए मौजूद रहेंगे.’
‘हमारे नेता को किसी पब्लिसिटी की परवाह नहीं है. वह बस यह पक्का करना चाहते हैं कि लोगों को न्याय मिले. उन्होंने पहले भी पेलेट गन की गोलीबारी से लोचाव को लगी चोटों का मुद्दा उठाया था, जिसे सरकार ने नकार दिया था. मुझे यकीन है कि राजनीति का उनका यह नया अंदाज भविष्य में भी जारी रहेगा, एआईसीसी के पदाधिकारी देवेंद्र यादव ने ईटीवी भारत को बताया. वह 21 अगस्त को दिन के ज़्यादातर समय पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर हुए विरोध प्रदर्शन में मौजूद थे.
उन्होंने आगे कहा, ‘जरा सोचिए एक आम आदमी की क्या हालत होती होगी, अगर विपक्ष के नेता (LoP) को एफआईआर दर्ज कराने के लिए आठ घंटे तक विरोध प्रदर्शन करना पड़े, और वह भी दिल्ली के बीचों-बीच. हमारे नेता को पुलिस स्टेशन इसलिए जाना पड़ा क्योंकि पिछले कुछ हफ़्तों से लोचाव की बात किसी ने नहीं सुनी थी.’
ब्यूरो रिपोर्ट




