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युद्ध संकट में गरीब देशों को चावल खिलाकर माई-बाप बना भारत…ऐसी दरियादिली की जमकर हो रही तारीफ

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच भारत कुछ गरीब अफ्रीकी देशों के लिए माई-बाप बन गया है। बीते 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध के दौरान भारत ने अफ्रीका के कई देशों को भर-भरकर चावल दिया है। साथ ही इमरजेंसी मेडिकल किट के साथ-साथ दवाएं भी दी हैं। इन देशों में अफ्रीकी देश बुर्किना फासो, सियरालियोन, मलावी, तंजानिया के साथ-साथ एशियाई देश अफगानिस्तान भी शामिल हैं। जब से खाड़ी में युद्ध शुरू हुआ है, तभी से भारत को तेल और गैस की सप्लाई में बाधा आ रही है, मगर भारत ने अमेरिका और ईरान समेत खाड़ी के ज्यादातर देशों से बात करके इस संकट से निकलने के लिए कूटनीतिक प्रयास शुरू कर दिए थे। इस दौरान भारत ग्लोबल साउथ के देशों की मदद देने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई। भारत की इस दरियादिली की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है।

बुर्किना फासो: 1,000 मीट्रिक टन चावल

भारत ने अफ्रीका के बेहद गरीब देश बुर्किना फासो को मानवीय मदद के तौर पर 1,000 मीट्रिक टन चावल भेजा है। इसका मकसद गृहयुद्ध से जूझ रहे बुर्किना फासो में विस्थापित और बेघर हो चुके समुदायों को खाद्य सुरक्षा दिया जाना है। भारत ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक भरोसेमंद विकास संबंधी और Humanitarian Assistance and Disaster Relief (HADR) पार्टनर है।
भारत की अफ्रीकी देशों को मानवीय मदद की चारों ओर सराहना हो रही है। सोशल मीडिया पर भी लोग विदेश मंत्रालय को टैग करके भारत की तारीफ कर रहे हैं।

सियरालियोन: 1,000 मीट्रिक टन चावल

विदेश मंत्रालय ने बीते 24 मार्च को ट्वीट किया था कि ग्लोबल साउथ पार्टनरशिप एक्शन में है। भारत ने सियरा लियोन के स्कूलों के मिडडे मील स्कीम की मदद के लिए 1,000 मीट्रिक टन चावल भेजा है। सतत विकास के लक्ष्यों को पूरा करने और ग्लोबल साउथ में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत प्रतिबद्ध है।

मोजांबिक: 500 मीट्रिक टन चावल और 89 टन दवाएं

  • भारतीय विदेश मंत्रालय ने 10 मार्च को किए एक पोस्ट में बताया था कि मोजांबिक में आई बाढ़ ने इसके केंद्रीय और दक्षिणी प्रांतों पर असर डाला है। भारत ने मोजांबिक के साथ एकजुटता दिखाने के लिए मानवीय मदद और आपदा राहत (HADR) पहुंचाया है। भारत ने मोजांबिक को 500 मीट्रिक टन चावल, 10 मीट्रिक टन टेंट-हाईजीन किट्स और 3 टन क्रिटिकल मेडिसिन भेजा है।
  • ये सभी चीजें नौसेना का एक जहाज लेकर पहुंचा है। इसके अलावा, 86 मीट्रिक टन जीवनरक्षक दवाएं पहले ही भेजा जा चुका था। भारत ने यह मदद भेजकर एक बार फिर जता दिया है कि वह ऐसे संकट के समय सबसे पहले मदद करेगा। वह हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीका में महत्वपूर्ण पार्टनर है।

मलावी: 1,000 मीट्रिक टन चावल

  • बीते 9 मार्च को भारत ने अल नीनो से प्रभावित होने की वजह से सूखे की मार झेल रहे अफ्रीकी देश मलावी को भी भारत ने मानवीय मदद भेजी थी।
  • 1,000 मीट्रिक टन चावल लेकर मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह से मलावी पहुंचा था। यह मदद ग्लोबल साउथ को मजबूत करने और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के पार्टनरों के बीच की जा रही है।
  • भारत ने नौसेना के आईएनएस त्रिकंद 12 मार्च को 2.5 टन जीवनरक्षक दवाएं और मेडिकल किट्स लेकर तंजानिया की राजधानी दार-एस-सलाम पहुंचा था। यह भी ग्लोबल साउथ के तहत मानवीय मदद थी।

ब्युरो रिपोर्ट

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