एक गलत फैसला… जिसने पूरी बदल दी निशा बांगरे की पूरी जिंदगी।
विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक बनकर जनता का सेवा करने का था सपना आज न विधायक रहीं न कलेक्टर अब निशा कहती हैं मेरी जिंदगी दस साल पीछे चली गई। अब समझ नहीं आता कि इसे फिर से कैसे शुरू करूं।”

बैतूल / – जिस सरकारी नौकरी को पाने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की, उसी डिप्टी कलेक्टर के पद को निशा बांगरे ने छोड़ दिया। सपना था विधायक बनकर उन लोगों की आवाज बनने का, जिनकी परेशानियां अक्सर सत्ता तक नहीं पहुंच पातीं। लेकिन चुनाव का टिकट नहीं मिला और उनका सपना अधूरा रह गया।
आज निशा न विधायक हैं और न ही डिप्टी कलेक्टर। पीछे मुड़कर देखती हैं तो कहती हैं—“मेरी जिंदगी दस साल पीछे चली गई है। अब समझ नहीं आता कि इसे फिर से कैसे शुरू करूं।”
मध्यप्रदेश के बैतूल से ताल्लुक रखने वाली निशा का जन्म और शुरुआती पढ़ाई बालाघाट में हुई। परिवार में पढ़ाई को हमेशा महत्व मिला। उन्होंने इंजीनियरिंग की और बाद में एमपीपीएससी की तैयारी शुरू की। 2016 की परीक्षा में उनका चयन डीएसपी पद के लिए हुआ। इसके बाद दोबारा परीक्षा देकर वह डिप्टी कलेक्टर बनीं।
प्रशासनिक सेवा के दौरान निशा आम लोगों के संपर्क में आईं। खासकर महिलाओं और वंचित समाज की परेशानियों ने उन्हें प्रभावित किया। लोगों ने उनसे चुनाव ल’ड़ने को कहा। निशा को लगा कि राजनीति के जरिए वह ज्यादा बड़े स्तर पर लोगों के लिए काम कर सकती हैं।
इसी सोच के साथ उन्होंने डिप्टी कलेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन इस्तीफा स्वीकार होने में देरी हुई और चुनाव का मौका निकल गया। उन्हें टिकट भी नहीं मिला।
अब निशा घर पर हैं। वह मां, पत्नी और बेटी की जिम्मेदारियां निभा रही हैं। सबसे ज्यादा चिंता उन्हें अपने पांच साल के बेटे के भविष्य की सताती है। वह कहती हैं कि उनके पास न पर्याप्त सेविंग्स हैं और न सुरक्षित भविष्य।
फिर भी निशा हार मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि अब जिंदगी को दोबारा खड़ा करना है। बच्चों की शिक्षा और सामाजिक बदलाव के लिए काम करना ही उनका अगला लक्ष्य है।
ब्यूरो रिपोर्ट




