चीन को भारत का कूटनीतिक तमाचा, आतंकवाद में पाकिस्तान का दिया साथ, अब चेहरा बचाना मुश्किल
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तानी फौज की मदद की थी और उसका यह कबूलनामा अब उसपर भारी पड़ रहा है। भारत ने बहुत ही सधे हुए अंदाज में उसे बड़ा कूटनीतिक झटका दिया है।

नई दिल्ली: चीन खुद को अमेरिका की तरह सुपर पावर साबित करने के एजेंडे पर काम कर रहा है। लेकिन, इसी दौरान उस पर पाकिस्तान के आतंकवादी करतूतों में शामिल होने का आधिकारिक खुलासा होने से उसकी साख पर बट्टा लगा है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होने वाली है। जियोपॉलिटिक्स में यह चीन के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका साबित हो सकता है।
भारत ने मंगलवार को पाकिस्तानी आतंकी गतिविधियों में सहयोग के लिए चीन को बहुत बड़ा कूटनीतिक तमाचा लगाया है। भारत ने कहा है कि आतंकवादी ढांचे की रक्षा करने की कोशिश करने से साख पर बट्टा लगेगा। भारत की यह प्रतिक्रिया उस रिपोर्ट के बाद आई है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तानी फौज की सक्रिय सहायता की।
चीन के पाखंड पर भारत का कूटनीतिक तमाचा
मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने पहले भी इस तरह (ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी फौज की मदद) की रिपोर्ट देखी थी। चीन के कबूलनामे से जुड़ी नई रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा-
यह उन देशों की जिम्मेदारी है, जो खुद को एक जिम्मेदार राष्ट्र मानते हैं..वे यह सोचें कि क्या आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा की कोशिशों का समर्थन करना, उनकी प्रतिष्ठा और स्थिति को किस तरह से प्रभावित करता है।
णधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय
चीन से आई रिपोर्ट ने ही खोली उसकी पोल
- दरअसल, पिछले हफ्ते चीन की ओर से ही ऐसी रिपोर्ट आई कि उसने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी फौज को तकनीकी मदद देने की बात कबूल ली है।
- यह पुष्टि चीन के एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन के एक इंजीनियर झांग हेंग ने सरकारी ब्रोडकास्टर सीसीटीवी को दिए इंटरव्यू में की।
- यह कंपनी चीन के एडवांस फाइटर जेट और यूएवी बनाती है।
- सीसीटीवी के हवाले से हॉन्ग कॉन्ग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने यह रिपोर्ट दी है।
- पाकिस्तानी वायु सेना चीन में बने J-10CE जेट उड़ाती है।
ब्रिक्स की बैठक में भाग नहीं लेंगे चीनी विदेश मंत्री
ब्रिक्स की बैठक में भाग नहीं लेंगे चीनी विदेश मंत्री
- भारत ने चीन की करतूत पर ऐसे समय में निशाना साधा है, जब 14 और 15 मई को नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की मीटिंग होने वाली है।
- दिलचस्प बात ये है कि मंगलवार को ही चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी अन्य कार्यक्रमों में अपनी व्यस्तता की वजह से ब्रिक्स की बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे।
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- उनकी जगह भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग बैठक में अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
भारत के कूटनीतिक निशाने के मायने
- भारत की ओर से आतंकवादी राष्ट्र पाकिस्तान की मदद के लिए चीन पर ऐसे समय में निशाना साधा गया है, जब नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होने वाली है।
- मतलब, भारत ब्रिक्स जैसे आर्थिक प्लेटफॉर्म पर चीन के साथ सहयोग भी कर रहा है, लेकिन आतंकवाद पर अपने नजरिए को और भी मजबूती से दुनिया के साथ साझा कर रहा है, ताकि अन्य देश भी देखें कि क्या सही है और क्या गलत।
- चीन के लिए अब वैश्विक शांति का मसीहा बनने की कोशिश करना आसान नहीं होगा, क्योंकि पाकिस्तान में उसने क्या किया, उसकी पोल अब खुल चुकी है।
- अगर चीन ने आगे भी इसी तरह से पाकिस्तान का सपोर्ट किया, जिसे भारत समेत दुनिया के कई देश आतंकवाद-प्रायोजित करने वाला राष्ट्र मानते हैं, तो चीन की विश्वसनीयता को और नुकसान पहुंचेगा।
- पश्चिम एशिया संकट में चीन बार-बार अंतर-राष्ट्रीय कानून और स्थिरता की दुहाई दे चुका है, लेकिन जब यह बात साबित हो चुकी है कि पाकिस्तान के साथ उसके हाथ भी आतंकवाद के खून से रंगे हुए हैं।
- इस वजह से उसके लिए आगे ऐसा पाखंड करना आसान नहीं होगा।
ब्युरो रिपोर्ट




