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थलापति विजय की बढ़ी धुकधुकी, TVK सरकार पर मंडराया नया खतरा, सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची बात

तमिलनाडु / – तमिलनाडु की सियासत में नया ट्विस्ट है. थलापति विजय की मुसीबत बढ़ने वाली है. तमिलनाडु में टीवीके सरकार के सामने एक नया संकट मुंह बाए खड़ी है. आज यानी गुरुवार को तमिलनाडु में थलापति विजय सरकार का कैबिनेट विस्तार है. इस बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है. इस विवाद के चलते टीवीके सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. मामला अब सीधे सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है. जी हां, सुप्रीम कोर्ट में थलापति विजय टीवीके सरकार के खिलाफ एक पीआईएल यानी जनहित याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में 13 मई को हुए विश्वास मत की सीबीआई जांच की मांग की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रस्ट वोट के दौरान भ्रष्टाचार और हॉर्स ट्रेडिंग हुई थी. अब देखने वाली बात होगी कि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर क्या करता है.

बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, थलापति विजय सरका के खिलाफ यह याचिका मदुरै निवासी केके रमेश ने दायर की है. इसमें केंद्र सरकार, सीबीआई और तमिलनाडु सरकार को पक्षकार बनाया गया है.  याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए. गौरतलब है कि अभी टीवीके सरकार को बने हुए महज 8-9 दिन ही हुए हैं.

दरअसल, हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में थलापति विजय की टीवीके (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी. हालांकि, पार्टी अपने दम पर बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई थी. तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 118 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है. टीवीके महज 108 सीटें ही जीत पाई थी, जो बहुमत से 10 कम है. ऐसे में उसे गठबंधन की सरकार बनानी पड़ी थी और 13 मई को विश्वास मत वाली अग्निपरीक्षा पास करनी पड़ी थी.

विजय सरकार को कितने विधायकों का समर्थन

विजय सरकार ने 144 विधायकों का समर्थन हासिल कर विश्वास मत जीत लिया था. पिटीशन में दावा किया गया है कि टीवीके के पास शुरुआत में केवल 108 विधायक थे. बाद में कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK, IUML, AIADMK के कुछ बागी विधायक और AMMK के एक विधायक का समर्थन मिला. याचिकाकर्ता का आरोप है कि कई विधायकों को पैसे और दूसरे फायदे देकर समर्थन हासिल किया गया.

याचिका में क्या-क्या दलील

याचिका में कहा गया है कि कुछ विधायक अपनी पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाकर वोटिंग में शामिल हुए, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि फ्लोर टेस्ट पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से नहीं कराया गया. AIADMK में हुई टूट का भी याचिका में जिक्र किया गया है. 25 AIADMK विधायकों ने TVK सरकार के पक्ष में वोट दिया, जबकि 22 विधायक विश्वास मत के खिलाफ रहे. इसके बाद दोनों गुटों ने एक-दूसरे के विधायकों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग की है.

याचिका में कहा गया है कि 91वें संविधान संशोधन के बाद किसी पार्टी में केवल विभाजन होने से कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती.  किसी दूसरी पार्टी में वैध विलय के लिए कम से कम दो-तिहाई विधायकों का समर्थन जरूरी होता है. याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि तमिलनाडु के मतदाता होने के नाते उनके और उनके परिवार के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हैं. यह याचिका अधिवक्ता नरेंद्र कुमार वर्मा के जरिए दायर की गई है.

ब्युरो रिपोर्ट

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