ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 : बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में बोले पीएम मोदी, ‘सॉल्यूशन प्रदान कर रहा है भारत’, पुतिन ने कहा, ‘रूस वैश्विक ऊर्जा में योगदान के लिए तैयार’

दिल्ली / – 18 वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है. भारत इस समूह की अध्यक्षता एवं सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. ब्रिक्स के देशों में भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं. शिखर सम्मेलन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है और दिल्ली पुलिस के 15,000 जवानों तथा अर्ध सैनिक बलों की 200 कंपनी तैनात की गई हैं. नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर शुक्रवार को मध्य दिल्ली रोशनी, फूलों और ब्रिक्स थीम वाले संकेतकों से सजी नजर आई. पटेल चौक, विंडसर प्लेस, मंडी हाउस, तीन मूर्ति, लोक कल्याण मेट्रो स्टेशन और पीएमओ गोलचक्कर समेत कई स्थानों पर सजावटी लाइट लगाई गई हैं. नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लोगो वाले एलईडी संकेतक लगाए हैं. महत्वपूर्ण मार्गों पर बिजली के खंभों पर सम्मेलन की ‘थीम’ वाले पोस्टर भी लगाए गए हैं.
रूस वैश्विक ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा में योगदान देने के लिए तैयारः पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के गतिशील एवं मजबूत घरेलू बाजारों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका देश वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा में योगदान देने के लिए तैयार है. पुतिन ने राष्ट्रीय राजधानी में ‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम’ को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया इस समय संरचनात्मक और बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है. उन्होंने कहा कि रूस पर्यटन, उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में दिलचस्प एवं संभावनाओं से भरे उपायों के लिए खुला है. पुतिन ने कहा, ‘‘हम अपने साझेदारों के साथ मिलकर वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा में योगदान देने तथा आर्कटिक परिवहन गलियारे और उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसे भरोसेमंद लॉजिस्टिक मार्ग विकसित करने के लिए तैयार हैं.’’
उन्होंने कहा कि रूस स्मार्ट प्रौद्योगिकी और मानव-रहित परिवहन जैसे क्षेत्रों में मानव संसाधन प्रशिक्षण तथा अनुप्रयुक्त अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने का भी इरादा रखता है. रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की यात्रा पर आए पुतिन ने पश्चिमी देशों पर निशाना साधा। हालांकि उन्होंने अमेरिका या किसी अन्य देश का प्रत्यक्ष तौर पर नाम नहीं लिया. उन्होंने कहा कि कई बार प्रतिस्पर्धा बदरंग शक्ल ले लेती है. पुतिन ने कहा, ‘‘ऐसे बदरंग रूप हमें सरकार और राज्य के स्तर पर भी देखने को मिलते हैं.’’ रूसी राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों की भी आलोचना की.
पुतिन ने जी-7 पर साधा निशाना, बोले, पता नहीं वे आप को क्यों ग्रेट बताते हैं
ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, “पिछले 5 सालों में, दुनिया की जीडीपी का 40% से अधिक हिस्सा ब्रिक्स देशों ने पैदा किया है, जबकि तथाकथित G7 – यानी ‘ग्रेट 7’ (मुझे नहीं पता कि वे ऐसा क्यों कहते हैं) – का योगदान सिर्फ 29% रहा है. इसी दौरान दुनिया की इकॉनमी में हुई ग्रोथ की बात करें, तो हम देखते हैं कि उस ग्रोथ का आधे से अधिक हिस्सा ब्रिक्स की वजह से हुआ है, जबकि G7 का हिस्सा सिर्फ 18% रहा है. ऐसा क्यों है? इसका जवाब आसान है, ब्रिक्स देशों में दुनिया की आधी से अधिक आबादी रहती है और इसीलिए, उनके पास बहुत ही डायनामिक और वाइब्रेंट घरेलू बाजार हैं.”
ग्लोबल सॉल्यूशन का केंद्र बन रहा भारत, बोले पीएम मोदी
ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय है – ‘मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण.’ पिछले 12 सालों में भारत ने इस मंत्र को अपनी आर्थिक और व्यापारिक नीतियों का आधार बनाया है. मजबूती (resilience) के मामले में, भारत ने एनर्जी से लेकर टेक्नोलॉजी तक के सेक्टर में सप्लाई चेन को अधिक विविध और भरोसेमंद बनाया है. इसी मजबूती का नतीजा है कि आज ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच भी भारत विकास और स्थिरता का भरोसा देता है. हम तेजी से अपनी सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और हवाई अड्डों का विस्तार कर रहे हैं. साथ ही, हम शिपबिल्डिंग, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल
मिनरल्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे रणनीतिक सेक्टर में नई क्षमताएं विकसित कर रहे हैं. भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने बड़े पैमाने पर फाइनेंशियल समावेशन और डिजिटल ट्रांजैक्शन को नई गति दी है. आज दुनिया के 50 फीसदी रियल-टाइम पेमेंट इसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके होते हैं.”
शिखर सम्मेलन में कौन-कौन से नेता ले रहे हैं भाग, एक नजर
1.शी जिनपिंग : चीन के राष्ट्रपति ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. चिनफिंग 2013 में चीन के राष्ट्रपति पद पर आसीन हुए थे. वह इससे पहले 2019 में चेन्नई के पास मल्लप्पुरम में मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर बैठक के लिए भारत आए थे. उन्होंने 2016 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए गोवा की यात्रा की थी. जिनपिंग सितंबर 2014 में पहली बार भारत आए थे, जब उन्होंने मोदी के साथ विस्तृत बातचीत की थी.
2.व्लादिमीर पुतिन : रूस के राष्ट्रपति भी शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में शुमार पुतिन 2012 से रूस के राष्ट्रपति हैं. रूस ब्रिक्स के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल है. पुतिन ने 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए दिसंबर 2025 में भारत की राजकीय यात्रा की थी.
3.सिरिल रामाफोसा : दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति का भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के साथ-साथ मोदी से द्विपक्षीय बातचीत करने का कार्यक्रम है. रामाफोसा को 2024 के राष्ट्रीय और प्रांतीय चुनावों के बाद उस साल जून में फिर से राष्ट्रपति चुना गया था. 27 अप्रैल 1994 को दक्षिण अफ्रीका में हुए पहले लोकतांत्रिक चुनावों के बाद रामाफोसा संसद सदस्य बने और संविधान सभा के अध्यक्ष चुने गए. दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति के तौर पर उन्होंने जनवरी 2019 में भारत के 70वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए नयी दिल्ली की यात्रा की थी.
4.मसूद पेजेश्कियान : ईरान के राष्ट्रपति भी शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. पेजेश्कियान 2024 में ईरान के राष्ट्रपति चुने गए थे. वह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. भारत और अमेरिका, दोनों ही देशों में उनके दौरे पर करीबी नजर होगी.
5.अब्देल फतह अल-सिसी : मिस्र के राष्ट्रपति का भी शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने और मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करने का कार्यक्रम है. अल-सीसी ने जनवरी 2023 में भारत की राजकीय यात्रा की थी और नयी दिल्ली में 74वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे. वह इससे पहले अक्टूबर 2015 में तीसरे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेन में भाग लेने के लिए नयी दिल्ली आए थे. उन्होंने सितंबर 2016 में भारत की राजकीय यात्रा भी की थी.
6.प्राबोवो सुबियांतो : इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. नयी दिल्ली की उनकी यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय साझेदारी और हजारों साल पुराने सांस्कृतिक संबंधों के महत्व को भी रेखांकित करती है. सुबियांतो ने 2025 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए नयी दिल्ली की यात्रा की थी. मोदी ने आखिरी बार जुलाई 2026 में इंडोनेशिया का दौरा किया था.
7.अबिय अहमद अली : अप्रैल 2018 में इथियोपिया के प्रधानमंत्री बनने वाले अली शिखर सम्मेलन में शामिल होने के अलावा मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे.
8.अनवर इब्राहिम : मलेशिया के प्रधानमंत्री ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे.
9.फैजल बिन फरहान अल सऊद : सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैजल भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे.
10.शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान : अबू धाबी के युवराज भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं और मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक भी तय है. शेख खालिद ने नयी दिल्ली में आयोजित एआई इंपैक्ट शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फरवरी 2026 में भारत का दौरा किया था. उन्होंने सितंबर 2024 में भी भारत की यात्रा की थी.
11.माउरो विएरा : ब्राजील के विदेश मंत्री ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. भारत और ब्राजील ‘ग्लोबल साउथ’ में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मजबूत प्रतिबद्धता साझा करते हैं.
विदेश मंत्रालय की ओर से साझा की गई सूची के मुताबिक, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले अन्य विश्व नेताओं में युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो; नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टिमा; क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज पारिला; बेलारूस के विदेश मंत्री मैक्सिम रिजेंकोव; वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव शामिल हैं.
ब्रिक्स दुनिया की 11 प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर-सरकारी संगठन है. इसके सदस्य देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं. बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने.
नाइजीरिया के उप राष्ट्रपति पहुंचे दिल्ली, किया गया स्वागत
नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति सीनेटर काशिम शेट्टिमा 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंचे. भारत और नाइजीरिया के बीच गहरे और पुराने संबंध हैं, जो लोगों के बीच मजबूत जुड़ाव पर आधारित हैं. विदेश मंत्रालय ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह दौरा इस बहुआयामी साझेदारी को और मजबूत करेगा.
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एक ही कार में पुतिन और मोदी प्रदर्शनी में भाग लेने पहुंचे
द्विपक्षीय बैठक के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक ही कार में बैठकर भारत मंडपम में हो रही प्रदर्शनी के लिए रवाना हुए. यहां जल्द ही ब्रिक्स बिज़नेस फोरम का लीडर्स सेशन आयोजित किया जाएगा.
पीएम मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बातचीत
नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अहम द्विपक्षीय बातचीत शुरू की. उनकी बातचीत के एजेंडे में व्यापार, रक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे शामिल हैं. द्विपक्षीय बातचीत के बाद, मोदी और पुतिन के दोनों देशों के उद्योग और व्यापार मंत्रालयों द्वारा आयोजित ‘इनोप्रोम’ (INNOPROM) प्रदर्शनी का दौरा करने की उम्मीद है. दोनों नेताओं के बीच चर्चा के अहम विषयों में ‘नॉर्दर्न सी रूट’ (उत्तरी समुद्री मार्ग) और ‘चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री कॉरिडोर’ शामिल हो सकते हैं. ‘नॉर्दर्न सी रूट’ आर्कटिक में रूस का मुख्य शिपिंग मार्ग है, जो उसके उत्तरी तट के साथ-साथ चलता है. यह आर्कटिक को एक अंतरराष्ट्रीय परिवहन कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की रूस की योजनाओं का एक अहम हिस्सा है. जैसे-जैसे रूस अपने आर्कटिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रहा है और कार्गो ट्रैफिक बढ़ाना चाहता है, यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक ध्यान आकर्षित कर रहा है. रूस ने कहा है कि भारत और रूस इस साल के अंत से पहले ‘नॉर्दर्न सी रूट’ के विकास में सहयोग के लिए एक अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, और 2027 के लिए एक संयुक्त पायलट यात्रा की योजना भी है.
रूसी प्रेसिडेंट पुतिन को तमिल क्लासिक तिरुक्कुरल की गई भेंट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्राचीन तमिल क्लासिक ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया.
ब्यूरो रिपोर्ट




