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QR कोड से 45 च्वाइस सेंटर संचालकों को बनाया निशाना! 20 से 25 लाख की कथित ठगी, रायपुर के 2 आरोपी गिरफ्तार।

बिलासपुर / – छत्तीसगढ़ में च्वाइस सेंटर और CSC संचालकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने के कथित मामले का बिलासपुर रेंज साइबर पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने QR कोड का दुरुपयोग कर बिलासपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में करीब 45 च्वाइस सेंटर संचालकों को अपना शिकार बनाया। मामले में रायपुर निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

 कैसे करते थे ठगी? जानिए पूरा तरीका

पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, आरोपी च्वाइस सेंटर पहुंचकर संचालक से कहते थे कि उनके फोन-पे पर आए भुगतान के बदले नकद रकम दे दें। इसके बाद QR कोड की फोटो अपने मोबाइल में लेकर चले जाते थे।

आरोप है कि दूसरा आरोपी उस QR कोड को स्कैन कर रकम ट्रांसफर करता था, जबकि सेंटर पर पहुंचा आरोपी संचालक से नकद राशि लेकर निकल जाता था। बाद में जब संबंधित संचालकों के बैंक खाते होल्ड हुए, तब उन्हें पता चला कि उनके खातों में आई रकम कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी हो सकती है।

 एक शिकायत से सामने आया ठगी का मामला

पुलिस के अनुसार, ग्राम खरकेना निवासी देवेंद्र रजक बिल्हा मोड़ स्थित लक्ष्मी च्वाइस सेंटर का संचालन करते हैं। उन्होंने शिकायत में बताया कि 5 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12:38 बजे एक व्यक्ति बलेनो कार से सेंटर पहुंचा और फोन-पे लेन-देन के बदले नकद देने की बात कही।

सहमति मिलने पर उसने QR कोड की फोटो ली। इसके बाद कथित तौर पर ₹16,000 की राशि का लेन-देन हुआ। अगले दिन शिकायतकर्ता के बैंक खाते पर होल्ड लग गया। बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि फोन-पे से संबंधित खाता साइबर फ्रॉड के मामले में होल्ड किया गया है।

इसके बाद अन्य च्वाइस सेंटर संचालकों के व्हाट्सऐप समूह से जानकारी मिली कि इसी तरह दूसरे संचालकों के साथ भी धोखाधड़ी हुई है।

हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में सक्रिय मिले आरोपी

पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच के दौरान आरोपी अंकित आहूजा हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में फिर से वारदात करने के प्रयास में घूमता मिला। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उसने अपने साथी आशीष केवटवानी के साथ कथित तौर पर ठगी करना स्वीकार किया।

पुलिस का कहना है कि अंकित अलग-अलग च्वाइस और CSC सेंटरों से QR कोड लेकर अपने साथी को भेजता था। इसके बाद आशीष QR कोड के जरिए लेन-देन करता था और अंकित संचालक से नकदी लेकर चला जाता था।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम

अंकित आहूजा (32 वर्ष) — निवासी कमल विहार, मुजगहन, जिला रायपुर।

आशीष केवटवानी (32 वर्ष) — निवासी प्रेमपार्क, महावीर नगर, तेलीबांधा, जिला रायपुर।

कई जिलों में फैला था कथित नेटवर्क

रेंज साइबर पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बिलासपुर के अलावा रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती और दुर्ग जिलों के संचालकों से भी धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आई हैं।

अब तक लगभग 45 पीड़ितों के आवेदन मिलने की जानकारी दी गई है। पुलिस ने कथित ठगी की कुल रकम करीब 20 से 25 लाख रुपये आंकी है।

 नकदी, कार, स्कूटी और मोबाइल जब्त

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान ₹1,02,000 नकद, घटना में प्रयुक्त एक बलेनो कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

मामले में थाना रेंज साइबर बिलासपुर में अपराध क्रमांक 05/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 317(4) और 3(5) में अपराध दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

इस कार्रवाई में थाना प्रभारी रेंज साइबर बिलासपुर प्रसाद सिन्हा, सहायक उपनिरीक्षक अशोक कश्यप तथा आरक्षक दीपक उपाध्याय और दीपक यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

च्वाइस सेंटर संचालक रहें सतर्क!

किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर QR कोड साझा करने या उसके जरिए लेन-देन करने से पहले पूरी प्रक्रिया समझें।

नकद रकम देने से पहले भुगतान की वास्तविकता और स्रोत की पुष्टि करें।

बैंक खाते में संदिग्ध लेन-देन या खाते पर होल्ड लगने की स्थिति में तुरंत बैंक और साइबर पुलिस से संपर्क करें।

सावधान रहें, क्योंकि QR कोड से जुड़ी छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी आर्थिक परेशानी का कारण बन सकती है।

ब्यूरो रिपोर्ट

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