राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय

शीर्ष पदों पर बैठे लोग एक खास पार्टी का प्रचार कर रहे : चुनाव आयोग पर प्रियंका गांधी का बड़ा हमला, सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

कांग्रेस सांसद ने आयोग के कामकाज को बताया 'गैरकानूनी और अनैतिक', कहा—निष्पक्ष चुनाव पर लगा प्रश्नचिह्न आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट के बाद विपक्ष हुआ हमलावर, ज्ञानेश कुमार पर मनमाने फैसलों के आरोप प्रियंका गांधी का सवाल—'जब व्यवस्था संभालने वालों का ही झुकाव हो, तो लोकतंत्र कैसे सुरक्षित रहेगा?'

नई दिल्ली/वायनाड। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और उसकी संवैधानिक निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। कांग्रेस महासचिव और केरल के वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि वे एक खास राजनीतिक दल के पक्ष में काम कर रहे हैं। प्रियंका गांधी ने इस पूरे प्रकरण को ‘गैरकानूनी और अनैतिक’ करार देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से तत्काल प्रभाव से इस्तीफे की मांग की है।
रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि जिन संस्थाओं और संवैधानिक पदों पर देश की पूरी चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी व निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने की जिम्मेदारी है, उनका किसी एक दल के प्रति झुकाव होना लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

संवैधानिक पदों पर बैठे लोग कर रहे राजनीतिक प्रचार’: प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल खड़े करते हुए कहा-खुला राजनीतिक झुकाव: “जिन लोगों पर देश की चुनावी व्यवस्था और संस्थाओं को निष्पक्ष ढंग से चलाने की ज़िम्मेदारी है, उनका किसी राजनीतिक दल के प्रति कोई झुकाव नहीं होना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से आज आयोग के शीर्ष पदों पर बैठे कुछ लोग न केवल राजनीतिक दलों के प्रति झुकाव रखते हैं, बल्कि उनका प्रचार भी कर रहे हैं।”
निष्पक्ष चुनाव पर संशय: उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव कराने वाली सर्वोच्च संस्था के मुखिया ही पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाएंगे, तो देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कैसे संभव हो सकते हैं।
असंवैधानिक कदम उठाने का आरोप: कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने ऐसे कई गैरकानूनी और असंवैधानिक कदम उठाए हैं, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख गिरी है। इसलिए उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और वे तुरंत इस्तीफा दें।

मीडिया रिपोर्ट के खुलासे से गरमाई सियासत
विपक्ष का यह कड़ा रुख एक प्रमुख अंग्रेजी राष्ट्रीय दैनिक की उस खोजी रिपोर्ट के बाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के भीतर गंभीर मतभेद हैं:
आयुक्तों की असहमति: रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और प्रक्रियात्मक बदलावों से जुड़े कई अहम नीतिगत फैसलों पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने बार-बार लिखित में अपनी असहमति और आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
एकतरफा फैसले का आरोप: विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने दोनों साथी आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए आयोग के नाम पर मनमाने तरीके से एकतरफा निर्देश जारी किए।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि संस्थागत बैठकों में मतभेद होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और आयोग के सभी अंतिम निर्णय पूरी तरह सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसके बावजूद कांग्रेस सहित पूरे ‘इंडिया’ गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और उनके इस्तीफे पर अड़ा हुआ है।

ब्यूरो रिपोर्ट

Related Articles

Back to top button