छत्तीसगढ़
चार साल का एमसीबी: नई पहचान से विकास की नई इबारत तक
प्रशासनिक ढांचे से चिकित्सा शिक्षा तक, सड़क और सिंचाई से पर्यटन की संभावनाओं तक: चार वर्षों में मजबूत हुई विकास की नींव“ नींव मजबूत हुई है, अब विकास का लाभ अंतिम गांव और अंतिम परिवार तक पहुंचाना अगली बड़ी चुनौती है।” महेन्द्र सिंह मरपच्ची

एमसीबी/09 सितम्बर 2026/ – किसी नए जिले की पहचान केवल उसके गठन की तारीख से नहीं बनती। उसकी पहचान तब आकार लेती है, जब प्रशासन जनता के करीब पहुंचता है, सड़कें दूरियों को कम करती हैं, अस्पताल भरोसा देते हैं, शिक्षा अवसर पैदा करती है और विकास की योजनाएं गांवों के जीवन में बदलाव का माध्यम बनती हैं। 9 सितम्बर 2022 को अस्तित्व में आया मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर यानी एमसीबी जिला आज अपने चौथे स्थापना दिवस पर इसी परिवर्तन की यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ा है।
चार वर्ष किसी जिले के इतिहास में लंबी अवधि नहीं होते, लेकिन एक नवगठित जिले के लिए यह संस्थागत आधार तैयार करने का महत्वपूर्ण समय होता है। इन चार वर्षों में एमसीबी ने अपनी अलग प्रशासनिक पहचान बनाने के साथ विकास की कई दिशाओं में कदम बढ़ाए हैं। प्रशासनिक अधोसंरचना, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, सड़क-पुल, पेयजल, सिंचाई, ग्रामीण विकास और पर्यटनक-इन क्षेत्रों में आगे बढ़ते काम जिले की संभावनाओं को नई दिशा दे रहे हैं।
चार वर्ष किसी जिले के इतिहास में लंबी अवधि नहीं होते, लेकिन एक नवगठित जिले के लिए यह संस्थागत आधार तैयार करने का महत्वपूर्ण समय होता है। इन चार वर्षों में एमसीबी ने अपनी अलग प्रशासनिक पहचान बनाने के साथ विकास की कई दिशाओं में कदम बढ़ाए हैं। प्रशासनिक अधोसंरचना, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, सड़क-पुल, पेयजल, सिंचाई, ग्रामीण विकास और पर्यटनक-इन क्षेत्रों में आगे बढ़ते काम जिले की संभावनाओं को नई दिशा दे रहे हैं।
कभी कोरिया जिले का हिस्सा रहे इस क्षेत्र को अलग जिला बनाने का मूल उद्देश्य था कि दूरस्थ वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों तक शासन-प्रशासन की पहुंच अधिक सहज और सुगम हो। आज इस उद्देश्य को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया दिखाई देती है। हालांकि यह यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। नए जिले के सामने उपलब्धियों को स्थायी परिणामों में बदलने और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी अब भी मौजूद है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की विकासपरक सोच और जिला प्रशासन की सक्रियता के समन्वय से जिले में विभिन्न परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। चुनौती यह है कि इन परियोजनाओं का प्रभाव जिला मुख्यालय से आगे बढ़कर मनेंद्रगढ़, चिरमिरी, भरतपुर, खड़गवां और दूरस्थ वनांचल के गांवों तक समान रूप से पहुंचे। जिला प्रशासन के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार एमसीबी का क्षेत्रफल 4,226.83 वर्ग किलोमीटर, जनसंख्या 3,81,287, साक्षरता दर 70.04 प्रतिशत, तीन विकासखंड, छह तहसील, दो उपतहसील, 200 ग्राम पंचायत और 376 गांव हैं। इतना विस्तृत भूगोल और विविध सामाजिक संरचना विकास की संभावनाओं के साथ बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी भी लेकर आती है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की विकासपरक सोच और जिला प्रशासन की सक्रियता के समन्वय से जिले में विभिन्न परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। चुनौती यह है कि इन परियोजनाओं का प्रभाव जिला मुख्यालय से आगे बढ़कर मनेंद्रगढ़, चिरमिरी, भरतपुर, खड़गवां और दूरस्थ वनांचल के गांवों तक समान रूप से पहुंचे। जिला प्रशासन के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार एमसीबी का क्षेत्रफल 4,226.83 वर्ग किलोमीटर, जनसंख्या 3,81,287, साक्षरता दर 70.04 प्रतिशत, तीन विकासखंड, छह तहसील, दो उपतहसील, 200 ग्राम पंचायत और 376 गांव हैं। इतना विस्तृत भूगोल और विविध सामाजिक संरचना विकास की संभावनाओं के साथ बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी भी लेकर आती है।

नया जिला, मजबूत प्रशासन-स्थायी आधार की ओर बढ़ते कदम
नए जिले के गठन के बाद सबसे पहली आवश्यकता एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा तैयार करने की थी। एमसीबी में इस दिशा में लगातार काम हुआ है। भरतपुर के जनकपुर क्षेत्र में अपर कलेक्टर और एसडीओपी कार्यालय की स्थापना दूरस्थ क्षेत्र के नागरिकों के लिए प्रशासनिक पहुंच को स्थानीय स्तर पर मजबूत करती है। इससे ग्रामीणों को विभिन्न प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता कम होगी और समय तथा संसाधनों की बचत होगी। मनेंद्रगढ़ में लगभग 18.75 करोड़ रुपये की लागत से नए एकीकृत जिला कार्यालय भवन की दिशा में कार्य आगे बढ़ रहा है। विभिन्न जिला स्तरीय कार्यालयों को एक परिसर में लाने की योजना प्रशासनिक समन्वय और नागरिक सुविधा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
चैनपुर में जिला पंचायत के नए भवन का भूमिपूजन भी इस संस्थागत विस्तार का हिस्सा है। लगभग 3 करोड़ 1 लाख 32 हजार रुपये की लागत से प्रस्तावित यह भवन ग्रामीण विकास से जुड़े प्रशासनिक कार्यों को आधुनिक आधारभूत सुविधा प्रदान करेगा। इन भवनों को केवल निर्माण परियोजनाओं के रूप में देखना इनके व्यापक महत्व को कम कर देगा। दरअसल, ये एक नए जिले की संस्थागत पहचान और प्रशासनिक स्थायित्व को मजबूत करने वाले आधार हैं।
सीतामढ़ी हरचौका की धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यता और मरीन फॉसिल पार्क का वैज्ञानिक महत्व इसे विविध पर्यटन संभावनाओं वाला क्षेत्र बनाता है। पर्यटन विकास के लिए केवल स्थल तक पहुंच बनाना पर्याप्त नहीं होगा। सड़क, पार्किंग, स्वच्छता, सुरक्षा, सूचना केंद्र और ठहरने की सुविधाओं के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी जरूरी होगी।
स्थानीय युवा गाइड बनें, परिवार होम-स्टे संचालित करें, महिलाएं स्थानीय व्यंजन और उत्पाद उपलब्ध कराएं तथा स्थानीय हस्तशिल्प एवं वनोपज को बाजार मिले तो पर्यटन सीधे ग्रामीण आय से जुड़ सकता है। एमसीबी के लिए पर्यटन मनोरंजन का क्षेत्र भर नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संभावित नया आधार है।
स्थानीय युवा गाइड बनें, परिवार होम-स्टे संचालित करें, महिलाएं स्थानीय व्यंजन और उत्पाद उपलब्ध कराएं तथा स्थानीय हस्तशिल्प एवं वनोपज को बाजार मिले तो पर्यटन सीधे ग्रामीण आय से जुड़ सकता है। एमसीबी के लिए पर्यटन मनोरंजन का क्षेत्र भर नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संभावित नया आधार है।
चिरमिरी की श्रमिक विरासत और वनांचल की सांस्कृतिक पहचान
एमसीबी की पहचान उसके वर्तमान विकास के साथ उसके इतिहास और संस्कृति से भी बनती है। चिरमिरी की कोयला खदानों और श्रमिक संस्कृति की अपनी विशिष्ट विरासत है। दूसरी ओर भरतपुर और आसपास का वनांचल आदिवासी जीवन, प्रकृति और लोक संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को संजोए हुए है। विकास की गति के बीच इस विरासत को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। आधुनिक अधोसंरचना के साथ प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय संस्कृति का संरक्षण हो, यही संतुलित विकास की पहचान होगी। मनेंद्रगढ़, चिरमिरी और भरतपुर को सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और रोजगार के एकीकृत नेटवर्क से जोड़ना जिले के भविष्य की दिशा को और मजबूत कर सकता है।
एमसीबी की पहचान उसके वर्तमान विकास के साथ उसके इतिहास और संस्कृति से भी बनती है। चिरमिरी की कोयला खदानों और श्रमिक संस्कृति की अपनी विशिष्ट विरासत है। दूसरी ओर भरतपुर और आसपास का वनांचल आदिवासी जीवन, प्रकृति और लोक संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को संजोए हुए है। विकास की गति के बीच इस विरासत को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। आधुनिक अधोसंरचना के साथ प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय संस्कृति का संरक्षण हो, यही संतुलित विकास की पहचान होगी। मनेंद्रगढ़, चिरमिरी और भरतपुर को सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और रोजगार के एकीकृत नेटवर्क से जोड़ना जिले के भविष्य की दिशा को और मजबूत कर सकता है।
चार साल बाद उपलब्धियों से आगे परिणाम की चुनौती
एमसीबी की चार वर्ष की यात्रा में कई महत्वपूर्ण आधार तैयार हुए हैं। प्रशासनिक भवन आकार ले रहे हैं, मेडिकल कॉलेज से चिकित्सा शिक्षा का नया अध्याय शुरू हुआ है, आधुनिक अस्पताल की स्वीकृति मिली है, सड़क और पुल परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है और पर्यटन की संभावनाओं को पहचान मिल रही है। लेकिन अब विकास की अगली कसौटी अलग है।
परियोजना स्वीकृत होना शुरुआत है, उसका समय पर और गुणवत्तापूर्ण पूरा होना उपलब्धि है; और उसका लाभ आम नागरिक तक पहुंचना विकास की वास्तविक सफलता।
यही कारण है कि एमसीबी के अगले चार वर्ष वर्तमान चार वर्षों से अधिक महत्वपूर्ण होंगे। अब ध्यान केवल नई परियोजनाएं शुरू करने पर नहीं, बल्कि चल रही परियोजनाओं को परिणाम में बदलने पर होना चाहिए। मेडिकल कॉलेज की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, अस्पताल का समयबद्ध निर्माण, सड़कों की गुणवत्ता और स्थायित्व, सिंचाई का खेत तक पहुंचना, पर्यटन से स्थानीय रोजगार का सृजन और प्रशासनिक सेवाओं का अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना आने वाले समय की प्रमुख कसौटियां होंगी।
एमसीबी के भविष्य की असली ताकत उसकी संभावनाएं हैं
चार वर्षों में एमसीबी ने नए जिले के रूप में अपनी बुनियादी पहचान मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। लेकिन इसकी सबसे बड़ी ताकत केवल निर्माणाधीन परियोजनाओं में नहीं, बल्कि उन संभावनाओं में है जो इसकी धरती, प्रकृति और लोगों में मौजूद हैं। यहां प्राकृतिक संपदा है, वन क्षेत्र है, कृषि की संभावना है, पर्यटन स्थल हैं, युवा शक्ति है और स्थानीय कौशल की समृद्ध परंपरा है। जरूरत इन सभी को एक साझा विकास दृष्टि से जोड़ने की है। यदि शिक्षा और कौशल को रोजगार से, सड़क को बाजार से, सिंचाई को कृषि आय से, पर्यटन को स्थानीय उद्यमिता से और प्राकृतिक संसाधनों को सतत आजीविका से जोड़ा जाए, तो एमसीबी आने वाले वर्षों में ग्रामीण आधारित विकास का एक मजबूत उदाहरण बन सकता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की नीतियां, जिला प्रशासन की सक्रियता और जनप्रतिनिधियों का सहयोग इस यात्रा के महत्वपूर्ण पक्ष हैं। लेकिन विकास को स्थायी और जन-केंद्रित बनाने के लिए जनता की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
चार साल की नींव, आने वाले कल की उम्मीद
चार वर्ष पहले अस्तित्व में आया एमसीबी आज अपनी पहचान के शुरुआती दौर से आगे बढ़ चुका है। अब उसके सामने केवल नया जिला होने का प्रश्न नहीं, बल्कि बेहतर जिला बनने की चुनौती है। बेहतर जिला वह होगा जहां प्रशासन सुलभ हो, स्वास्थ्य भरोसेमंद हो, शिक्षा अवसर दे, सड़कें दूरियां घटाएं, किसान समृद्ध हों, महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हों, युवाओं को रोजगार मिले और पर्यटन से स्थानीय परिवारों की आय बढ़े।
विकास की वास्तविक तस्वीर तब पूरी होगी, जब जिला मुख्यालय में दिखाई देने वाला बदलाव गांव की चौपाल, किसान के खेत, विद्यार्थी के स्कूल, मरीज के अस्पताल और परिवार के रोजमर्रा के जीवन तक पहुंचे।
एमसीबी की चार वर्ष की यात्रा इसी दिशा में बढ़ते एक नए जिले की कहानी है। नींव मजबूत हो चुकी है, अब उस पर विकास की ऐसी इमारत खड़ी करने का समय है, जिसमें हर गांव की हिस्सेदारी हो और हर परिवार को आगे बढ़ने का अवसर मिले। स्थापना दिवस पर एमसीबी के लिए इससे बेहतर शुभकामना शायद कोई नहीं हो सकती कि आने वाले वर्षों में यह जिला अपनी प्राकृतिक संपदा, मानव संसाधन, संस्कृति और विकास की संभावनाओं को एक साथ लेकर सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए।
विकास की वास्तविक तस्वीर तब पूरी होगी, जब जिला मुख्यालय में दिखाई देने वाला बदलाव गांव की चौपाल, किसान के खेत, विद्यार्थी के स्कूल, मरीज के अस्पताल और परिवार के रोजमर्रा के जीवन तक पहुंचे।
एमसीबी की चार वर्ष की यात्रा इसी दिशा में बढ़ते एक नए जिले की कहानी है। नींव मजबूत हो चुकी है, अब उस पर विकास की ऐसी इमारत खड़ी करने का समय है, जिसमें हर गांव की हिस्सेदारी हो और हर परिवार को आगे बढ़ने का अवसर मिले। स्थापना दिवस पर एमसीबी के लिए इससे बेहतर शुभकामना शायद कोई नहीं हो सकती कि आने वाले वर्षों में यह जिला अपनी प्राकृतिक संपदा, मानव संसाधन, संस्कृति और विकास की संभावनाओं को एक साथ लेकर सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए।
ब्यूरो रिपोर्ट




